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एक ऐसा पेड़ जिस पर हर साल 15 लाख होता है खर्च

किसी बड़े नेता या अभिनेता की सुरक्षा के लिए पुलिस या अन्य सुरक्षा बल तैनात हो ये तो आपने सुना होगा पर अगर हम आपको बताएं की एक ऐसा पेड़ भी है जिसके लिए पुलिस और अन्य सुरक्षा बल तैनात किये जाते हैं,तो की आप यकीन कर पाएंगे.दरसल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच में सलामतपुर की पहाड़ी पर एक ऐस पेड़ है जिसकी सुरक्षा किसी वीआईपी की तरह की जाती है.आईये जानते हैं कुछ विशेष बातें इस जगह के बारे में.

दरसल यहाँ एक पीपल का पेड़ है जिसे बौधि वृक्ष के नाम से जाना जता है.ऐसा कहा जाता है की साल 2012  में श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने भारत का दौरा किया था,उसी समय उन्होंने इस पेड़ को लगाया था.आपको बता दें की ईसासे 531  वर्ष पहले बौधि वृक्ष के नीचे ही भगवान बुध को ज्ञान प्राप्त हुआ था.बौद्ध धर्म में इस पेड़ का बहुत महत्व है.इस  पेड़ की सुरक्षा में 4 या 5 जवान इसकी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं.इसी के साथ इस पेड़ की सिंचाई के लिए साँची नगर पालिका अलग से टैंकर भिजवाती है.यहाँ अपर हर हफ्ते कृषि विभाग के अधिकारी भी पेड़ की निगरानी के लिए आते रहते हैं.इस पेड़ की देख रेख क लिए हर साल 12 से 15 लाख का खर्च आता है.

ऐसा कहा जाता है की तीसरी  शताब्दी में सम्राट अशोक ने अपने बेटे महेंद्र और संघमित्रा को बौधि वृक्ष की एक टहनी देकर,बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए श्रीलंका भेजा था.उन्होंने ये बौधि वृक्ष श्रीलंका के अनुराधापुरा में लगाया था जो आज भी वहां है.वहीं जिस वृक्ष के निचे भगवान् बुध को ज्ञान प्राप्त हुआ था,वो बिहार के गया में है.इस पेड़ को कई बार नष्ट करने का प्रयास किया गया,पर चमत्कार ऐसा है की यहाँ हर बार एक नया वृक्ष उग जाता था.लेकिन बाद में साल 1876  में ये वृक्ष प्राकृतिक आपदा के चलते नष्ट भी हो गया था.इसके बाद साल 1880 में अफसर लार्ड कनिंघम ने श्रीलंका के अनुराधापुरा से बौद्धवृक्ष की सहखा मंगा कर उसी बौधगया में स्थापित कर दिया.उसके बाद से अब तक ये वृक्ष आज भी वहीं है.


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