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नीतीश कैबिनेट के दो मंत्रियों की कुर्सी खतरे में, जानिए क्यों

नीतीश कैबिनेट के दो मंत्रियों की कुर्सी खतरे में, जानिए क्यों

बिहार की नीतीश सरकार के दो मंत्रियों की कुर्सी खतरे में है. राज्यपाल कोटे से बाहर विधान पार्षद बरकरार रहेंगे या नहीं इसको लेकर पटना हाईकोर्ट पर अब सबकी निगाहें टिकी हुई है. मामले में हाईकोर्ट का रूख सख्त होता है तो नीतीश के दो मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है. नीतीश सरकार के जनक राम और अशोक चौधरी की कुर्सी खतरे में आ सकती है. दोनाें ही मंत्री राज्यपाल कोटा से मनोनीत होकर विधान पार्षद बने और बाद में दोनों को सरकार में मंत्री बनाया गया. इसके साथ ही जदयू के दिग्गज नेता उपेन्द्र कुशवाहा के MLC पद पर भी संकट खड़ा हो सकता है. क्योंकि उपेन्द्र कुश्वाह भी राज्यपाल कोटेसे MLC नियुक्त हुए थे. 

बता दें कि राज्यपाल कोटे से की गई नियुक्तिायाें को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी. याचिका में कहा गया है कि भारत के संविधान के तहत साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता और सहकारिता आंदोलन से जुड़े हुए लोगों का ही मनोनयन हो सकता है. और जिसको मनोनयन किया जाता है उसे काम का अनुभव होना चाहिए. लेकिन विधान पार्षदों के मनोनयन में संविधान के प्रावधानों की अनदेखी की गई है. मामले में पटना हाईकोर्ट ने याचिका पर पिछले सप्ताह सुनवाई करने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया था.

राज्यपाल कोटे से ये हुए मनोनीत 

अशोक चौधरी, जनक राम, संजय सिंह, उपेन्द्र कुशवाहा, राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन सर्राफ़, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, देवेश कुमार, प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर और निवेदिता सिंह.

 


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