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BJP से अलग होंगे CM नीतीश कुमार, JDU-RJD होगी एक!

BJP से अलग होंगे CM नीतीश कुमार, JDU-RJD होगी एक!

नीतीश कुमार एकबार फिर पाला बदलने की तैयारी में दिख रहे है. बीजेपी के साथ उनके रिश्ते लगातार खराब होते जा रहे है. बीजेपी और जेडीयू के बीच जमीनी स्तर पर दूरियां साफ-साफ देखी जा रही है. केन्द्र सरकार की योजनाओं वाले कार्यक्रमों में जदयू के मंत्रियों को न्यौता तक नहीं दिया जा रहा है, तो दूसरी ओर जदयू भी अब बीजेपी को जबाव देने की तैयारी में है. संकेत साफ है कि नीतीश जल्द ही एनडीए छोड़ सकते है.

नीतीश कुमार ने 2015 का विधानसभा का चुनाव आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके लड़ा लेकिन दो साल बाद ही 2017 में वो महागठबंधन से अलग हो गए और एनडीए में शामिल होकर सरकार बना ली. महागठबंधन छोड़ने से पहले बीजेपी की ओर से उस समय के डीप्टी सीएम तेजस्वी यादव और उनके करिबयों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे. हर दूसरे दिन विपक्ष के नेता सुशील मोदी प्रेस के सामने आते और लालू परिवार पर नए आरोप लगाते. नीतीश कुमार चाहते थे कि तेजस्वी यादव सबूतों के साथ बीजेपी के आरोपों पर सफाई दे. तेजस्वी ने हर बार कहा कि जो आरोप लगाए जा रहे है वो पूरी तरह से मनगणंत है. लेकिन नीतीश को तेजस्वी की ये सफाई पसंद नहीं आई और उन्होंने 2017 में महागठबंधन से खुद को अलग कर लिया और बीजेपी के साथ सरकार बना ली.

डिप्टी सीएम पर गंभीर आरोप

2019 का चुनाव भी उन्होंने NDA के साथ लड़ा. लेकिन अभी एक साल भी पूरा नहीं हो पाया है और 2017 जैसी स्थितियां बिहार में फिर बनने लगी है. इस बार फिर डिप्टी सीएम ही आरोपों के घेरे में है. बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम बनाए गए तारकिशोर पर परिवार के लोगों की मदद करने का आरोप है. तेजस्वी यादव का दावा है कि डिप्टी सीएम ने उनके करीबियों को 50 करोड़ से ज्यादा के ठेके दिए गए थे. जबकि वो इसके योग्य भी नहीं थे. कानून के मुताबिक ठेका विशेषज्ञ कंपनियों या ठेकेदारों को दिया जाना चाहिए. इस मामले में नीतीश कुमार सरकार के मंत्रियों ने अपने ही रिश्तेदारों केा ठेका दिया है. तारकिशोर प्रसाद ने बहू बेटियों पर उसके पति को ठेका दिया है. 

तारकिशोर की सफाई

तेजस्वी यादव के आरोपों पर तारकिशोर की सफाई भी आई है. उनका कहना है कि अगर कोई व्यापार करना चाहता है, इसलिए उसे नहीं रोका जा सकता की वो मंत्री का रिश्तेदार है. लेकिन तारकिशोर की सफाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पसंद नहीं आ रही है. वो डिप्टी सीएम तारकिशोर से नाराज है. नीतीश ने संकेत दिए है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को इस मामले में संज्ञान लेना है. क्योंकि उनके डिप्टी सीएम के चलते पूरी सरकार को ही शर्मींदगी का सामना करना पड़ रहा है. तारकिशोर को सार्वजनिक मंच से पूरे मामले में अपना पक्ष रखना चाहिए. नीतीश ने ये भी संकेत दिए है कि यदि इस मामले में विपक्ष का रूख सख्त होता है और बीजेपी की ओर से इस पर स्पष्टिकरण नहीं आता है तो जदयू के लिए मुश्किले हो सकती है. संकेत साफ है कि नीतीश कुमार बीजेपी से अलग होने का रास्ता भी देख रहे है, लेकिन सवाल ये कि क्या 2013 की तरह 2021 में भी आरजेडी नीतीश कुमार को सीएम बनाने के लिए तैयार होगी.


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