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बिहार में बने नए समीकरण, तेजस्वी की बनेगी सरकार!

बिहार में बने नए समीकरण, तेजस्वी की बनेगी सरकार!

बिहार की एनडीए सरकार मुश्कील में है. नीतीश कुमार जितना विपक्षी दलों के सवालों से परेशान है. उससे ज्यादा परेशानी उनके गठबंधन सहयोगियों ने ही बना रखी है. बीजेपी और जदूय नेता एक दूसरे के खिलाफ बयान देने में कोई मौका नहीं छोड़ते. इसी बीच अब नीतीश कुमार और सरकार के बीच लड़ाई शुरू हो गई है. ऐसे में नीतीश कुमार अब नई राह तलाशे दिख रही है, तो क्या बिहार में एनडीए की सरकार अब जाने वाली है.

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नीतीश कुमार और नरेन्द्र मोदी के रिश्ते सुलझने से ज्यादा उलझते दिख रहे है. वैसे तो केंन्द्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी और जदयू साथ साथ है. लेकिन जेडीयू नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार केन्द्र सरकार से नाराज दिख रहे है. कारण भी है. नीतीश ने केन्द्र सरकार से जब भी कुछ मांगा उनकी मांग पूरी नहीं हुई. पटना में केन्द्रीय युनिवर्सिटी का मामला हो या फिर विशेष राज्य के दर्जे का, पीएम नरेन्द्र मोदी ने नीतीश कुमार की मांग हमेशा अनसुनी की है और अब मामला जातिगत जनगणना का है. नीतीश कुमार इसे लेकर पूरी ताकत लगाए हुए है. यहां तक की नीतीश के दबाव में बीजेपी के नेताओं को भी उनके साथ आना पड़ा.

पिछले दिनों जब नीतीश कुमार बिहार से सर्वदलिय प्रतिनिधि मंडल को लेकर दिल्ली पहुंचे और पीएम से मिले तो नीतीश के साथ बीजेपी नेताओं ने भी जातिगत जनगणना की मांग का समर्थन किया. नीतीश ने इस मुलाकात क बाद कहा की पीएम ने उनकी बाते गंभीरता से सुनी, लेकिन ये गंभीरता केन्द्र द्वारा कोर्ट में दायर हलफनामे में नही दिखी. क्योकि केन्द्र की ओर से साफ कह दिया गया है कि वो जातिगत जनगणना को तैयार नहीं है. केन्द्र के इस हलफनामे के बाद से ही बिहार एनडीए के जेडीयू और बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ना शुरू हो गई है. आरजेडी तो इसे लेकर नीतीश कुमार को घेरने में लगी हुई है. तो नीतीश कुमार का रूख आरजेडी के प्रति अब नरम पड़ने लगा है. क्योंकि दोनों ही दल जातिगत जनगणना के पक्ष में है.

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दरअसल, नीतीश कुमार इस मामले में इतना आगे निकल चुके है कि उनके लिए पीछे लौटना मुश्किल दिख रहा है. उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना देश के लिए जरूरी है. केन्द्र सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई. जातिय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी, तब पता चलेगा कि जा पीछे है उसे आगे कैसे किया जाए.

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तो नीतीश एक तरफ मोदी सरकार पर दबाव बना रहे है, तो दूसरी तरफ नए विकल्प की तलाश भी कर रहे है. वो सीएम की कुर्सी को लेकर परेशान है, जिसकारण वो एनडीए नहीं छोड़ पा रहे है. लेकिन उनकी ओर से संकेत साफ दिए जा रहे है की वो इस मुद्दे पर वो पीछे नहीं हटेंगे, चाहे उनकी कुर्सी ही क्यों ना चली जाए. ऐसे में साफ है कि नीतीश कुमार एक बार फिर एनडीए से किनारा कर सकते है.


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