liveindia.news

लालू यादव का पीकदान उठाते है IAS अफसर

लालू यादव का पीकदान उठाते है IAS अफसर

ब्यूरोक्रेसी के बयान को लेकर बीजेपी नेता उमाभारती इन दिनों विवादों में है. वही उमाभारती ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ट्वीट का जबाव देते हुए उनसे माफी मांगी और उन्हें कड़वा नहीं बोलने की नसीहत भी दी. उमा भारती ने इसके बाद एक के बाद कई ट्वीट किए, जिसमें उन्होंने बताया कि साल 2000 में जब वह अटल सरकार में पर्यटन मंत्री थी. उस समय बिहार में राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थी. उस दौरान उनके पति लालू यादव के साथ मेरा हेलिकॉप्टर से बोधगया जाना हुआ था. 

उमाभारती ने लिखा है कि जब हम हेलिकॉप्टर में बैठे हुए थे, तो हमारे साथ एक आईएएस अफसर भी बैठे हुए थे. उस दौरान लालू यादव ने मेरे सामने पीकदान में थूका और पीकदान को उस आईएस अधिकारी को थमा दिया और उनके खिड़की के पास रखने को कहा वही आईएस अधिकारी ने भी ऐसा ही किया. उमा ने आगे लिखा की जब मुझे बिहार का प्रभारी बनाया गया तो उस समय मैने पीकदान को मुद्दा बनाया था. मैंने पूरे बिहार के अधिकारियों से अपील की थी कि आज आप उनका पीकदान उठाते हो तो कल हमार भी उठाना पड़ेगा. इसलिए अपनी गरिमा का ध्यान रखो और पीकदान की जगह फाइल और कलमदान उठाओं इसके बाद बिहार में सत्ता पलट गई और में नीतीश के सीएम बनने के बाद बिहार से लौट आई. 

उमा भारती ने दिग्विजय सिंह ने मांगी माफी

बता दें कि ब्यूरोक्रेसी को लेकर दिए अपने बयान को लेकर उमाभारती विवादों में घिरी हुईं है. उमा भारती ने अपने एक बयान में कहा था कि आपको गलतफहमी है ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती है, चप्पल उठाने वाली होती है. चप्पल उठाती है हमारी... हम लोग ही राजी हो जाते हैं. उसके लिए क्योंकि हमें समझाया जाता है कि आपका बहुत बड़ा चक्कर पड़ जाएगा. उमाभारती के बयान के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा था कि उमा आप मेरी छोटी बहन के नाते मुझे कम बोलने के लिए चेताती रही हैं. लेकिन आपने नौकरशाहों के ख़िलाफ़ जो अपशब्दों का उपयोग किया है वे घोर आपत्तिजनक हैं.

उमा ने मांगी माफी!

दिग्विजय सिंह के इस ट्वीट के बाद आज उमा भारती ने एक पत्र के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्जिय सिंह से माफी मांगी है. उमा भारती ने दिग्विजय सिंह को लिखे एक पत्र में कहा है कि ब्यूरोक्रेसी पर आपने मेरे दिए गये बयान पर उचित प्रतिक्रिया दी है. मुझे  अपनी ही बोली भाषा का गहरा आघात लगा है. मैं आपके पीडे पड़ जाती थी कि दादा संयत भाषा नहीं बोलते, यह तो बिल्कुल ऐसा हो गया जैसा रामायण जी में लिखा है कर उपदेश कुशल बहुतेरे, सो आचरही ते नर न घनेरे उमा भारती ने आगे लिखा की मैं आगे से अपनी भाषा सुधार लूंगी, आप भी ऐसा कर सकें तो कर लें और अंत में लिखा कि आपकी सच्ची में लाड़ली बहन उमाभारती.


Leave Comments