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लव जेहाद कितनी हकीकत कितना फसाना

देश में एक बार फिर लव जेहाद को लेकर बहस छिड गई है. बहस इसलिए है कि अब प्रदेश की सरकारे लव जेहाद पर केवल चेतावनी नही दे रही, बल्कि अब उस चेतावनी को अमली जामा पहनाया जा रहा है. लव जेहाद को लेकर दो राज्यो की सरकारो को ने विधेयक लाने की तैयारी कर ली है. इस विधेयक को कानूनी जामा पहनाने के लिए विधानसभा के सत्र की तैयारी भी हो चुकी है. देश का भगवाधारी सरकारे मसलन पहले उत्तरप्रदेश की योगी सरकार और फिर मध्यप्रदेश के शिवराज सरकार. दोनो ही सरकारों ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है.

अगर ड्राफट पर गौर करे तो लव जेहाद के आरोपी और आरोपी के साथ देने वाले दोनो को 10 साल की सजा होगी साथ ही लव जेहाद के लिए निकाह पढाने वाले मौलाना, काजी मंत्र पढने वाले पंडित और क्राइस्ट के सामने रस्मे निभवाने वाले पादरी सभी दोषी होगे और उनको भी 5 साल की सजा का प्रावधान होगा.

विधेयक को कानून बनाने पहले दोनो ही राज्य इसके ठोक बजा के मजबूत करना चाहते है मतलब कि कानून इतना मजबूत हो कि बाद में कोई इसे चैलेज नही कर सके. बहरहाल सबसे बडी बात ये है कि आखिर पंथनिरपेक्ष की बात करने वाले देश में लव के साथ साथ जेहाद कैसे गया कैसे दो बालिग में दो धर्मो के बीच का गठबंधन जेहाद का रूप ले लिया.

दरअसल, कई सारे ऐसे मामले समाने आए है जिसमें दो अलग अलग धर्म (खासकर हिदू और मुस्लिम) के बीच ही शादिया को लेकर समय के साथ साथ कई तरह की शिकायते आने लगी. शादी के बाद खुलासा होना कि लडके ने धर्म छुपा कर शादी की है, शादी के लिए पहले और या शादी के बाद में जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है. बाते पहले तो ये सारी काम किसी साधारण क्राइम के तौर पर देखी जाती थी. लेकिन समय में बदलाव के साथ-साथ एक धर्म विशेष ने लव में जेहाद को ढूढ लिया औऱ हिदू लडकियो से शादी करने के बदले कई सारे इनामो से नवाजने की बाते भी अंदरखाने में ने लगी.

आखिरकार सरकार ने कानून लाकर इस तरह के क्राइम पर कंट्रोल करने की सोची. अब लव जेहाद पर कानून अमली जामा लेने वाला है. इस कानून के जरिए सरकार जबरन और बहलाफुसला कर गैर धर्म की शादियो पर रोक लगाना चाहती है. कानन जो तैयार हो रहा है उसमें बजे साफतौर पर लिखा है कि दो महीने पहले डी एम कोर्ट में धर्म बदलने वाले और बदलाने वाले दोनो को ही हलफनामा देना होगा. साथ ही ये भी बताना होगा कि वो किसी दबवा में धर्म नही बदल रहे. सरकार की मंशा है कि इसके जरिए खासकर हिदू युवतियो को सही गलत का फैसला करा सके.

अगर किसी धर्म विशेष की लडकियों को इसके लिए टारगेट किया जा रहा है तो कानून बहुत जरूरी है. लेकिन कही न कही सरकार को इस बात की ताकीद भी करनी होगी कि इस कानून का गलत इस्तेमाल तो नही होगा इस बात की ताकीद भी सरकारों को करनी होगी. क्योकि एक धर्म निरपेक्ष देश में जहां संविधान बालिग युवक युवतियो को अपनी मर्जी से शादी करने की इजाजत देता है, ऐसे में ये कानून कही उस अधिकार का उल्लघन न करे.


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