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चुनावी बाजीगर, कब जागेगा नायक?

चुनावी बाजीगर, कब जागेगा नायक?

देश की आजादी के बाद से देश को कई प्रधानमंत्री मिले जिनका नाम इतिहास में तक दर्ज हो चुका है. देश को कुछ प्रधानमंत्री वंश परंपरा के चलते मिले, तो कुछ अपनी काबिलियत पर तो कुछ भाग्य से तो कुछ दुर्भाग्य से तो कुछ तिकड़म बाजी से मिले. लेकिन देश को तीन ऐसे प्रधानमंत्री संगठन और विचाराधारा पर मिले जिनमें पहला प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, दूसरा अटल बिहारी वजपेयी और तीसरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जोकि अभी वर्तमान में हैं.

राजीव गांधी से लेकर अटल बिहारी, मनमोहन से ने अपने कार्यकाल में कई बड़े काम किए, लेकिन नायक की उपाधी नहीं ले पाए. लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नायक ही नहीं खलनायक की उपाधी जरूर ले चुके हैं. बीजेपी नेताओं का कहना है कि मोदी को नायक नहीं खलनायक हैं. मोदी प्रचारक जीवन से बीजेपी में आए थे. इतना ही नहीं 15 सालों तक गुजरात के मुख्यमंत्री भी रहे. मोदी के भाषणों, लटकों-झटकों लच्छेदार बातों ने मोदी को देश का प्रधानमंत्री बना दिया. मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में बीजेपी को पूर्ण बहुमत भी दिला दिया. मोदी कश्मीर से धारा 370 हटाने में काययाब हुए, राम मंदिर का फैसला हिंदुओं के पक्ष में कराने में कामयाब हुए, लेकिन चीन से आई उपहार स्वरूप महामारी कोरोना से देश को बचाने में फिसड्डी साबित होते जा रहे हैं. देश की जनता जीएसटी की मार, नोटबंदी की मार से रो पड़ी, लेकिन कोरोना की मार ने तो लाखों लोगों का जीवन ही बर्बाद करके रख दिया.

मोदी सरकार ने जब देश में नोटबंदी और जीएसटी लागू किया था, तो विरोध भी हुए, लेकिन आम जनता ने ये सोच के सहन कर लिया कि मोदी कुछ तो करेगा, लेकिन कोरोना महामारी ने देश के हालात ऐसे कर दिए की पहली बार जनता मोदी से निराश और परेशान नजर आने लगी है. कोरोना महामारी ने मोदी को अग्निपरीक्षा में धकेल दिया है. आज देश में कोरोना की दूसरी लहर से रोजाना हजारों की तादात में लोग मरने लगे हैं. अस्पतालों में बिस्तर नहीं है, दवाईयां नहीं, इसके अलावा ऑक्सीजन का संकट भी देश में मंडरा रहा है. देश के गंदे हालातों को देख अब न्यायपालिका भी चिंतित होने लगी है.

हाल ही में शिवसेना के मुख पत्र सामना ने सुप्रीम कोर्ट ओर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है. सामना में प्रकाशित एक लेख में कहा है जग गए, क्या लाभ सामना ने अपने लेख में कहा है कि कोरोना महामारी से देश के हालात गंभीर हैं. देश में बिस्तर से लकर ऑक्सीन, वैक्सीन की कमी चिंता का विषय है. वहीं सुप्रीम कोर्ट भी कह चुकी है कि हम मूकदर्शक नहीं बन सकते हैं. कोई बड़ा कदम उठाना होगा. कोर्ट के बयान से साफ तौर पर झलके लगा है कि निश्चत तौर पर न्यायपालिका कुछ करने वाली है.

सामना ने आगे कहा है कि मोदी सरकार कोरोना को रोकने में पूरी तरह से नाकाम सिद्ध हो चुकी है. देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. इसका सिर्फ और सिर्फ कोई जिम्मेदार है तो मोदी सरकार है. जब महाराष्ट्र के कोविड सेंटरों में आग लगती है, तो बीजेपी के नेता इस्तीफा मांगते हैं. अब जब सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार पर सबालिया निशान खड़े कर रही है तो अब बीजेपी नेता किस-किस से इस्तीफा मांगेगे. देश में कोरोना लोगों की जान ले रहा है. ये गैर इरादतन हत्या का मामला है. सर्वोच्च न्यायालय को अब स्पष्ट करना चाहिए कि किसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए. देश के हालात नियंत्रण के बाहर हैं. कोरोना से निपटने के लिए सेना मैदान में आ चुकी है. दूसरे देश भारत को सुविधाएं उपलब्ध कराने की मंशा जाहिर कर चुके हैं. ऐसे हालातों में अब मोदी सरकार को राजनीति छोड़कर सभी दलों को एकजुट करके देश को बचाने के काम जुट जाना ही देश की भलाई है.

सामना के प्रकाश लेख में बात तो देशहित में कही गई है. राजनैतिक विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि ये दौर राजनीति करने का नहीं बल्कि एकजुट होकर महामारी का सामना करने का है. तभी अच्छे परिणाम आएंगे और उन्हीं परिणामों से तय होगा कि वो इतिहास में नायक बनेंगे या खलनायक?


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