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जानिए, वसंत पंचमी के अदभुत रहस्य

बसंत पंचमी के आगाज होते ही वनों, उपवनों में फलों से लदी शाखाओं, पेड़ों पर चहकती कोयल, फूलों पर मंडराती तितलियां और भौरे, यह सभी हमे वसंत ऋतु का अहसास कराती है. वंसत पंचमी का अलग ही महत्व होता है, क्योंकि इस दिन कवि, लेखक, गायक अपने उपकरणों की पूजा के साथ मां सरस्वती की वंदना करते है. लेकिन इस पर्व के पीछे कई रहस्य भी छुपे है, जिनके बारे में कुछ लोगों को ही पता है. आज हम आपकों उन रहस्यों के बारे में बताने जा रहे है जिनको जानना बेहद ही जरूरी है. 

1. बसंत ऋतु के आते ही प्रकृति का कण-कण आनंद और उल्लास से गा उठता है. इस दिन प्रेमी-प्रेमिकाओं के दिल भी धड़कने लगते हैं. जागरण का अभ्यास करने वाले लोगों के लिए वसंत ऋतु उत्तम है.
 
2. वसंत पंचमी प्रेम दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रास का उत्सव मथुरा में मुख्य रूप से मनाया जाता है. ग्रंथों के अनुसार इस दिन कामिनी और कानन में यौवन फूट पड़ता है. इसलिए यह दिन प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए बहुत शुभ माना जाता है.
 
3. वसंत पंचमी के दिन से प्रकृति में भी परिवर्तन होता है. प्रकृति में जो-जो पुराना है सब झड़ जाता है और प्रकृति नया श्रृंगार करती है. वसंत पंचमी के आने के बाद से अंगारे दहक उठते हैं, सरसों के फूल फिर से गीत गाने लगते हैं. 
 
4. मूलतः वसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता का जन्मदिन मनाया जाता है. इस दिन कवि, गायक, संगीतकार अपने उपकरणों की पूजा करते है और देवी सरस्वती माता की आराधना करते है, क्योंकि सरस्वती देवी की पूजन करने से ज्ञान और कला में बढोत्तरी होती है.




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