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इस झील में तैरते है करोड़ों रूपये के नोट

साथियो आज हम आपको बताने जा रहे है अरबो का खजाना. खजाना सुनकर आपके मन में आया होगा कि ये खजाना या तो किसी बैंक में होगा. किसी तिजोरी में इतने बडे खजाने की कल्पना करते हुए आपके मन में ये भी आ रहा होगा कि इस खजाने के आसपास कितना पहरा होगा. लेकिन हम आपको बता दे कि ऐसा कुछ भी नहीं है, और उससे मजेदार बात ये है कि इस खजाने से आजतक कोई एक रूपया भी नही चुरा सका है. ये खजाना है हिमाचल प्रदेश में. हिमाचल की मंडी जिले के इस खजाने की देखभाल और रक्षा करते है एक नाग देवता. तो आइए आपको दिखाते है झील में तैरता खजाना.

हिमाचल प्रदेश के मंडीदीप जिले से 70 किलोमीटर दूर है ये झील और इस जगह का नाम है कमराहा. समुद्र तल से तीन हजार तीन सौ तैतीस फीट की ऊचाई पर बसी इस पहाडी पर एक मंदिर है. इसका नाम है कमरूनाथ का मंदिर. इस मंदिर के सामने बनी है. झील और दुनिया का सबसे बडा खजाना इसी झील में है. इस झील में अरबों का सोना-चांदी जेवर और नोट पडे है. आपको जानकर हैरत होगी कि ये सारा का सारा खजाना है कमरूनाग का. कमरूनाग का मंदिर इस झील के किनारे बसा है और कमरूनाथ एक नाग है जो इस अरबो के खजाने की देखभाल करते है. कोई भी इस खजाने पर बहुरी नियत नही डाल सकता है. 

दरअसल, बाबा कमरूनाग के दर्शन करने वाले भक्त अपना सारा चढ़ावा इस झील में ही चढाते है. इस झील में सोने-चांदी के जेवर से लेकर सोने-चांदी के सिक्के नोट सभी कुछ इस झील में चढावे के रूप में डाला जाता है. लोग अपने साथ सिक्के लाकर भी चढ़ाते है और कई बार तो पहने हुए गहने उतारकर झील में डाल दिए जाते है. इस झील के ऊपर तैरते नोट इसकी गवाही देते हैं. इस खजाने को यहां होने को लेकर कई तरह की किवदंती है.

पुरात्व विभाग के अनुसार ये महाभारत काल का खजाना है. वहीं किवदंती है कि जब महाभारत का युद्द जीतकर स्वर्ग की ओर जा रहे थे, तब रास्ते में कमरूनाग के दर्शन करने रूके और उन्होंने अपने सारे जेवर उतार कर यहीं झील में फेक दिए. उसके बाद से इस मंदिर में चढ़ावा झील में फेकने की परंपरा शुरू हो गई. कमरूनाग पहाडों के सबसे बडे देवता है कहते है यहां जो मन्नत लेकर आते है पूरी होती है. इस जगह साल में एक बार मेला भी भरता है और मन्नत पूरी होने पर भक्त आकर अपने जेवर झील में चढ़ा जाते है.

इस झील में आजतक किसी ने उतर कर नही देखा, न किसी ने इसके पैसे लेने की हिम्मत दिखाई या खजाने पर बुरी नजर डाली. कहते है ये खजाना पांडवो को है और पांडवो ने इसकी रक्षा की जिम्मेदारी कमरूनाग को दी है इसलिए झील पर जिस जिसने बुरी नजर रखी वो अफने मंसूबो में कामयाब होना तो दूर, उल्टा किसी ने किसी बडी मुसीबत में फंस गया. हैरत की बात तो ये है कि आमतौर पर मंदिरों में चढावा बढाने को लेकर पंड़ित लगे रहते है, लेकिन इस मंदिर के पुरोहित जो भी चढ़ावा आता है उस पैसे के जेवर खरीदकर सबकुछ झील में ही चढ़ा देते है. भगवान के पास आया सारा चढ़ावा सारी सपंत्ति झील को भेंट कर दी जाती है.


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