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इस किले में की थी शिव ने साधना, नही भेद सका कोई इसका रहस्य

हिदुस्तान के इस किले का रहस्य आजतक कोई नही जान सका. सात दरवाजों सात आंगन के इस किले में दिन में तो सबकुछ सामान्य होता है. लेकिन रात होते ही किले की रहस्मयता लोगो को डराने लगती है. कभी किले की प्राचीर से घुंघरू की आववाजे आती है तो कभी समुद्र मंथन के समय जैसी अजीब हलचले और कभी कभी रात को रानी महल की रंगते आदमी को बदहवास कर जाती है. यही वजह है कि इस किले पर दिन में तो लोग आते है लेकिन रात के अंधेरे के पहले लौट जाते है. हालाकि ये अपने दौर का अपराजेय दुर्ग रहा है लेकिन फिर भी इसकी भव्यता रात के अंधेरे में डरावने किस्से को कहती दिखती है.

हम बात कर रहे है कांलिजर के किले का. जी हां कालिंजर का ये किला वैसे तो उत्तरप्रदेश में है. उत्तप्रदेश में मध्यप्रदेश की सीमाओ को मिलाकर बना है बुंदेलखंड और इसी बुंदेलखंड को में जिला है बांदा. बांदा जिले में बसा ये किला रहस्मयी किस्सो से भरपूर है. आप भी जानिए उन किस्सो को कि आखिर क्यो कालिंजर अभेद दुर्ग होने के बाद भी वीरता के कम अंधेरे के ज्यादा किस्से कहता है. 

इस किले का मंजर जितना भव्य है उतनी ही इसकी ऊचाई लोगो के डरा जाती है. जमीन से 800 फीट ऊची पहाडी पर बना इस किले मे अंदर जाने के लिए सात दरवाजे है. सातो ही दरवाजे एक दूसरे से बिल्कुल अलग है. यहा की दीवारो पर खंभो पर कुछ उकेरा हुआ है. कुछ लिखा हुआ है. कहा जाता है कि ये जो लिखावट है वो दफन खजाने का पता है. इन लिपियो में किले के खजाने का रहस्य छुपा हुआ है. कई लोगो का मानना है कि अगर ये लिपी पढी जाए तो शायद किले के रहस्य से ही परदा हटे कि आखिर ये आलिशान दुर्ग रात में क्यो अजीबो गरीब हो जाता है. 

कालिंजर के किले के अंदर कई साम्राज्य की कहानी एक साथ देखी जा सकती है. इस पर तीन बडे राजपूत चंदेल सहित सोलंकियो का राज रहा. इस पर पांच मुगल शासको ने भी आक्रमण किया. आखिरकार इस दुर्ग को अकबर ने जीता और बीरबल को तोहफे में दे दिया.इस दुर्ग के अंदर कई सारे मंदिर भी है और कई सारी गुफाऐ भी. गुफाऐं किले से निकलती है लेकिन कहृां खुलती है किसी को नहीं पता. ये सारे मंदिर तीसरी से पांचवी सदी गुप्त काल के है. मान्यता है कि भगवान शंकर ने विष पीने के बाद यही आकर तपस्या की थी और विष की ज्वाला को शांत किया था. किले के अंदर बने नीलकंठ मंदिर है जिसे कहते है नागो ने बनवाया था और इसकी कहानी पुराणो में भी मिलती है. इस मंदिर के अंदर बना शिवलिंग बहुत पुराना है. नागो के बनाए जाने के चलते कहते है मंदिर के ऊपर से जलकी धारा आती है जो बारहो महीने शिवलिंग पर गिरकर जल का अभिषेक करती रहती है.

यहा पर सीता सेज नाम की गुफा भी है और सीता कुंड भी इस कुंड में नहाने से चर्म रोग दूर होते है. प्राचीन काल में यह दुर्ग जेजाकभुक्ति (जयशक्ति चन्देल) साम्राज्य के आधीन था. बाद में यह 10वीं शताब्दी तक चन्देल राजपूतों के आधीन और फिर रीवा के सोलंकियों के आधीन रहा. इन राजाओं के शासनकाल में कालिंजर पर महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक, शेर शाह सूरी और हुमांयू जैसे योद्धाओं ने आक्रमण किए, लेकिन इस पर विजय पाने में असफल रहे. कालिंजर विजय अभियान में ही तोप का गोला लगने से शेरशाह की मृत्यु हो गई थी.


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