liveindia.news

जानिए केदारनाथ धाम का रहस्य्मयी सच

हिन्दू धर्म में चारों धामों की यात्रा का बहुत महत्त्व है. इन धामों में केदारनाथ धाम का अपना अलग ही महत्व है. आस्था का प्रतीक माना जाने वाले केदारनाथ धाम अपने आप में चमत्कार है. 2013 जून में आई आपदा के बाद सबकुछ नष्ट हो गया है, लेकिन मंदिर को कुछ नुक्सान नहीं हुआ. इस धाम के इतिहास में कुछ ऐसे रहस्य हैं, जिन्हे बहुत कम लोग ही जानते हैं. आज हम आपको केदारनाथ धाम के कुछ ऐसे ही रहस्यों से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिसके बारे में किसी को नहीं पता.

श्री केदरनाथ 12 जीतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. यह ज्योतिर्लिंग त्रिकोण आकार का है. इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना के बारे में कहा जाता है की हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे. उनकी तपस्या से प्रसन्न हो कर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनकी प्रार्थना अनुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने के वर प्रदान किया. 

केदरनाथ धाम के बारे में एक और रहस्य है. ऐसा बताया जाता है की महाभारत का युद्ध जीतने के बाद पांडव हत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे. इसके लिए पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद लेना चाहते थे , लेकिन भगवान शिव पांडवों से नराज़ थे. शंकर जी के दर्शनों के लिए पांडव काशी गए, लेकिन उन्हें वो वहां नहीं मिले. पांडव उन्हें खोजते हुए हिमलाय तक पहुँच गए. भगवान शंकर पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे वहां से अंतध्र्यान होकर केदार में जा बसे. दूसरी ओर पांडव भी लगन के पक्के थे, वे उनका पीछा करते हुए केदार तक भी पहुँच गए. भगवान शकर ने तब तक बैल का र्रोप धारण कर लिया ओर पशुओं में जा मिले. पांडवों को शक हुआ , तो भीम ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया और दो पहाड़ों पर पैर फैला दिया. 
अन्य पशु, बैल तो पैरों के नीचे से निकल गए, लेकिन शंकर रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए. ये देख भीम बलपूर्वक इस बैल पर कूदे, लेकिन बैल जमीन में अंर्तध्यान होने लगा था, तब भीम ने बैल का पीठ का भाग पकड़ लिया.  ये देखकर भगवान शंकर, पांडवों की भक्ति देख कर प्रसन्न हो गए. भगवान शंकर ने तुरंत दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया. तभी से भगवान शंकर बैल के पीठ की आकृति पिंड के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते हैं. 

ऐसा भी खा जाता है की जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंर्तध्यान हुए , तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ. उसी जगह पर अब भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर है. इसी के साथ भगवान शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमदेश्वर में, और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए.
ऐसे होती है केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना 

प्रातः काल शिव पिंड को प्राकृतिक तरीके से स्नान कराकर, घी लेपन किया जाता है. इसके तुरंत बाद ही घी दीपक जलाकर, आरती उतारी जाती है. इस समय भक्त गण मंदिर में जाकर पूजा क्र सकते हैं. लेकिन संध्या में भगवान का श्रृंगार किया जाता है, इस समय भक्त गण दूर से ही भगवान के दर्शन कर सकते हैं. केदारनाथ के पुजारी मैसूर के जंगम ब्राह्मण ही होते हैं. केदारनाथ और बद्रीनाथ का बहुत महत्त्व हैं. ऐसा माना जाता है की जो मनुष्य केदारनाथ के दर्शन किये बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल हो जाती है. केदारनाथ समेत, नर नारायण मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों का नाश कर जीवन को सुखमय बना देता है.


Leave Comments