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जानिए क्या लिखा है गरुड़ पुराण में आत्महत्या करने वालों के लिए

दुनिया में कई लोगों ने अपने हाथों से ही अपनी जान ली है. ऐसे लोग दुनिया के सारे मोह का त्याग करके अपना जीवन खत्म कर देते हैं. हाल ही में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने भी आत्महत्या कर ली है. लेकिन क्या आप जानते हैं की आत्महत्या करने वाले लोगों किए साथ क्या होता है ? दरअसल हिन्दू धर्मानुसार आत्महत्या जैसी कोई चीज़ नहीं होती है. आत्मा की किसी भी प्रकार से हत्या नहीं की जा सकती है, हत्या केवल शरीर की होती है. इसलिए इसे स्वघात या देहत्या कहा जा सकता है. 

आपको बता दें की गरुड़ पुराण के अनुसार दूसरों की हत्या करने वालों को ब्रह्म दोष लगता है. लेकिन जो खुद के देह की ही हत्या करता है उसे और बड़ा दोष लगता है. वैदिक ग्रंथों आत्मघाती मनुष्यों के बारे में लिखा है की,'आत्मघाती मनुष्य मृत्यु के बाद अज्ञान और अंधकार से परिपूर्ण, सूर्य के प्रकाश से हीन हो जाता है. 

यानि की जो मनुष्य खुद की हत्या करता है उसका अगला जीवन अंधकार की तरह वीराना हो जाता है. इसके साथ ही उसका अगला जन्म एक ऐसे ग्रह पर होता है जहां पर पुण्य नहीं होता. गरुड़ पुराण के साथ ही बाकी धर्मों के ग्रंथों में भी आत्महत्या को निंदनीय माना जाता है. क्यूंकी धर्म के अनुसार कई योनियों के बाद मानव का जीवन मिलता है, ऐसे में उस जीवन को कुछ परेशानियों के चलते गंवा देना मूर्खता है और काफी बड़ा पाप माना गया है. साथ ही ऐसे शरीर से फिर आत्मा भी नराज़ हो जाती है, इसलिए आत्महत्या नहीं करनी चाहिए. 

 


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