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यहां आज भी दिन में दो बार गायब होते हैं भोले बाबा

क्यो आप जानते है आदिव माहदेव के दो ऐसे धाम है जो जिन में दो बार आपकी आंखों से गायब हो जाते है. और बडे मजे की बात है कि इस धाम तक आप तभी पंहुच सकते है, जब आपको भगवान वहां तक ले जाना चाहें.

ये धाम दोनाें ही गुजरात में है. गुजरात के अरब सागर में बने अन धामों की कहानी भी निराली है. खंबात की खाडी मेंम बने इस धाम का नाम है निष्कलंक महादेव. कहते है इस धाम में पूजा करने और नहाने से सभी प्रकार के कलंक खत्म हो जाते है. खंबात की खाडी के बीचों-बीच बने इस धाम को आप दूर से देखकर समझ ही नही सकते की यहां भोले बाबा के कोई बडे धाम हो सकते है. ये धाम समुद्र के बीचाें-बीच है और जब समुद्र चाहता है तभी इसमें से आप जा सकते है. जी हां समुद्र में दो बार टाई टाइड आता है जिसे हिंदी में हम ज्वार भाटा कहते है.

ज्वार भाटे के चलते दिन में दो बार ये धाम पानी में डूब जाता है और बाबा महादेव केवल दो ही बार दर्शन देते है. हाई टाइड खत्म होने के बाद जब आप धाम के बीच में पहुंचेगे तो पता चलेगा कि यहां एक नही पूरे पांच शिवलिंग है और इन पूरे पांच शिवलिगाें की साइड भी अलग-अलग है. इसमे से एक बडा है जो छोटे और एक का साइज मोटा है.

शास्त्रो के मुताबिक ये शिवलिंग पांडवों ने स्थापित किए थे. इन शिवलिंग की स्थापान महाभारत के बाद हुई. महाभारत के बाद भी पांडवाें की बैचैनी खत्म नही हुई. वो अपनो की हत्या के पाप से दबे हुए थे. अपने भाईयाें की हत्या के पाप से मुक्ति चाहते थे. इसके लिए उनको भगवान कृष्ण ने उपाय बताया. भगवान कृष्ण ने कहा कि तुम सभी भाई एक काली गाय और काला ध्वज लेकर निकलो और चलते रहोंए जहां जाकर ये ध्वज और गाय सफेद हो जाए तो वहां जाकर शिव की आराधना करों सारे पापों से मुक्ति मिलेगी. पांडव काली गाय और काला ध्वज लेकर चलते रहेए चलते-चलते जब समुद्र किनारे आए तो गाय और ध्वज दोनों सफेद हो गए वहीं पांडवाें ने शिवलिंग की स्थापना की और भगनाव की आराधना की. हैरत की बात ये है कि ये पांचो शिवलिंग 5000 साल से भी पुराने है, लेकिन दिन में दो बार हाई टाइड आने के बाद भी इन शिवलिंग को कभी कोई हिस्सा नही टूटा बल्कि इस जगह पर बाद में बनाए गए सभी सट्रक्टर टूट गए, लेकिन इन शिवलिंगो का कभी कोई नुकसान नही हुआ. इस शिवलिंग और शिवधाम का वर्णन स्कन्ध पुराण में भी मिलता है.

इसी शिवधाम की तरह दूसरा शिवधाम भी है वो इस अरब सागर के दूसरी और भावनगर भरूच में है. भरूच के समुद्र में ये पूरा का पूरा धाम है. इस धाम भी दिन मे दो बार गायब होता है. इस धाम मे भी हाई टाइट के चलते केवल कुछ ही घंटे दर्शन हो पाते है. कहते है शिव के इस धाम को खुद कार्तिकेय ने बनाया है इस धाम का नाम स्तंभधाम है और इसका जिक्र भी स्कन्ध पुराण में मिलता है. इस धाम मे भी दूसरे धाम की ही तरह पांच शिवलिंग है लेकिन कहते है कि चार शिवलिंग अभी भी समुद्र में डूबे है केवल एक शिवलिंग की ही पूजा होती है. कहा जाता है दोनो अदृश्य होने वाले भोले बाबा के धाम की खासियत है यहां ब्रहम मूर्हूत में दिखने वाली रोशनी. कहते है निश्कलंक धाम में आज भी पांच बालक खेलते देखे जाते है और उनके साथ एक ज्योति भी आती है जो स्थानीय लोगो ने देखी है. अनुमान है कि ये पांच बालक कोई और नही बल्कि पांच पांडव है और ये ज्योति भोले बाबा की दिव्य ज्योति है जो उन पांडवो के साथ आती है.


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