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जानिए नरक चतुर्दशी की सही पूजा विधि और महत्त्व

धर्म डेस्क : दीपवाली के त्यौहार से पहले ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती है. दीपवाली के दो दिन पहले धनतेरस और एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाई जाती है. धनतेरस पर तो नए बर्तन और जेवरात खरीदने का महत्त्व होता है. लेकिन नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है, इसका महत्व कम ही लोग जानते हैं. आइये हम आपको बताते हैं की नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है और इस दिन की पूजा का महत्त्व. 

ऐसा बताया जाता है की नरक चतुर्दशी तिथि को ही भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था. नरकासुर राक्षस ने 16,000 कन्याओं को अपने वश में कर लिया था. इस राक्षस की कैद से कन्याओं को आजाद कराने के लिए भगवान कृष्ण को उसका वध करना पड़ा था. इसके बाद कन्याओं ने श्रीकृष्ण से कहा था कि अब हमें समाज स्वीकार नहीं करेगा. जिसके बाद कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए भगवान कृष्ण ने उनसे विवाह कर लिया था.


 
अमूमन धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी मनाई जाती है, लेकिन इस बार तिथियों के आधार पर दीपवाली और नरक चतुर्दशी एक ही दिन पर मनाई जाएंगी. 14  नवम्बर को दिन के 2 बजे तक चतुर्दशी मनाई जाएगी और इसके बाद से दीपवाली मनाई जाएगी. नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण के अलावा यम देवता भी की पूजा की जाती है. इस दिन यम के नाम का दीया घर के मुख्य दरवाजे के पास जलाया जाता है. ये दीया परिवार से सदस्यों के बेहतर स्वास्थ्य की कामना और घर से नरक को दूर करने को प्रतीक होता है. 


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