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इस बार की शरद पूर्णिमा का कुछ अलग ही है महत्व, जानिए

हर साल की तरह इस साल पड़ने वाली शरद पूर्णिमा का महत्व कुछ अलग ही है. हालांकी शरद पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोग कंफ्यूजन में है, क्योंकि इस बार शरद पूर्णिमा 30 अक्टूबर को शाम को 5 बजकर 47 मिनट से लग रही है, जो 31 अक्टूबर की रात 8 बजकर 21 मिनट तक रहेगी. इसलिए इस बार 30 अक्टूबर को ही पूर्णिमा मनाई जाएगी. देश के मशहूर पंडीत कपिल शर्मा काशी महाराज के अनुसार उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा तिथि 31 अक्टूबर, शनिवार को रहेगा जिसके फलस्वरूप स्नान दान व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन संपन्न होंगे. क्योंकि कोई भी पूर्णिमा रात को ही मानी जाती है, इसलिए शरद पूर्णिमा कोजागरी पूर्णिमा 30 अक्टूबर, शुक्रवार को ही मनाना उत्तम रहेगा. खीर बना कर, इसी रात चन्द्रमा की किरणों में रखी जाएगी. 

शरद पूर्णिमा की रात बहुत खास होती है. क्योंकि इस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. जिसे अमृत काल भी कहा जाता है. इस व्रत को आश्विन पूर्णिमा, कोजगारी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी व्रत के नाम से भी जानते हैं. माना जाता है की शरद पूर्णिमा के दिन महालक्ष्मी का जन्म हुआ था. देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थी. शास्त्रों के अनुसार यह भी माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरूड़ पर बैठकर पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आती हैं और घर-घर जाकर वरदान देती है. और जो सोता है, वहां लक्ष्मी माता दरवाजे से ही लौट जाती है. शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी कर्ज से भी मुक्ति दिलाती हैं. यही कारण है कि इसे कर्ज मुक्ति पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन पूरी प्रकृति मां लक्ष्मी का स्वागत करती है. जिसे देखने के लिए देवता स्वर्ग से पृथ्वी पर आते है. 

क्यों किया जाता है शरद पूर्णिमा का व्रत 

पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की दो बेटियां थीं. दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं. एक बार बड़ी बेटी ने पूर्णिमा का विधिवत व्रत किया, लेकिन छोटी बेटी ने व्रत छोड़ दिया. जिससे छोटी लड़की के बच्चों की जन्म लेते ही मृत्यु हो जाती थी. एक बार साहूकार की बड़ी बेटी के पुण्य स्पर्श से छोटी लड़की का बालक जीवित हो गया. कहते हैं कि उसी दिन से यह व्रत विधिपूर्वक मनाया जाने लगा.

शरद पूर्णिमा का मुहूर्त

30 अक्टूबर की शाम 05:47 मिनट से 31 अक्टूबर की रात 08:21 मिनट तक.

शरद पूर्णिमा के दिन महालक्ष्मी की पूजा की जाती है. महालक्ष्मी की पूजा करने से उनके भक्तों की परेशानियां दूर होती है. शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र किरणों का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है. क्योंकि इससे निकलने वाली किरणें अमृत समान मानी जाती है. उत्तर और मध्य भारत में शरद पूर्णिमा की रात्रि को दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है. कहा जाता है कि चंद्रमा की किरणें खीर में पड़ने से यह कई गुना गुणकारी और लाभकारी हो जाती है.

मशहूर पंडीत कपिल शर्मा काशी महाराज


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