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होलिका दहन क्यों की जाती है, जानिए सत्य घटना

पौराणिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर कई वर्षो पहले राजा हिरण्यकश्यपू राजा राज करता था, जोकि बहुत ही अत्याचारी राजा के नाम से जाना जाता था. राजा हिरण्यकश्यपू ने एक बार अपनी प्रजा को आदेश दिया था की वह भगवान की पूजा नहीं करेंगे और न ही मानेंगे, बल्कि प्रजा को मेरी पूजा करनी चाहिए, में ही उनका भगवान हूं. राजा हिरण्यकश्यपू का एक पुत्र भी था. जिसका नाम प्रहलाद था. प्रहलाद ईश्वर का परम भक्त था. प्रहलाद ने अपने पिता राजा हिरण्यकश्यपू की आज्ञा की निंदा की और ईश्वर के प्रति अपनी भक्ति जारी रखी. 

अपने पुत्र को ऐसा करने पर राजा हिरण्यकश्यपू को गुस्सा आ गया और प्रहलाद को दंड देने की ठान ली. राजा हिरण्यकश्यपू ने अपनी बहन होलिका की गोद में अपने पुत्र प्रहलाद को बिठा दिया ओर दोनों को आग लगा दी. होलिका को तो अग्नि में नहीं जलने का ईश्वर का वरदान मिला था. लेकिन होलिका अत्याचारी का साथ देने के कारण होलिका अग्नि में जल गई और सदाचारी ईश्वर परम भक्त प्रहलाद बच गए. उसी दिन से बुराईयों को अग्नि में नष्ट करने के लिए होलिका दहन करने की परंपरा शुरू हो गई, जो आज तक चली आ रही है.

होलिका दहना का शुभ मुहूर्त

तिथि - 9 मार्च 2020
तिथि प्रारंभ - 9 मार्च 2020 सुबह 3ः03 से 
तिथि समाप्त - 9 मार्च 2020 रात 11ः17 तक 
होलिका दहन - शाम 6ः26 से रात्रि 8ः52 तक 


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