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अमरनाथ गुफा की वो कहानी, जिसे जो सुनता है वो अमर हो जाता है

तीर्थों के तीर्थ कहे जाने वाली अमरनाथ यात्रा का श्रद्धालु पुरे साल भर इंतज़ार करते हैं. बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए लोग काफी दूर-दूर से आते हैं. कहते हैं यहां पर श्रद्धालु लोग कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करके आते हैं. यह यात्रा हर साल जुलाई के महीने से शुरू होती है और 46 दिनों तक चलती है. हिन्दू धर्म में अमरनाथ गुफा सबसे ज़्यादा विशेष मानी जाती है. ऐसा कहा जाता है की इस गुफा में ही भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था. आइये आपको बताते हैं इस अमरनाथ की यात्रा और गुफा का रहस्य. 

पुराणों में ऐसा कहा गया है की जम्मू कश्मीर में अमरनाथ की गुफा वो स्थान है जहां पर भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर होने की कथा सुनाई थी. माता पार्वती जब शिव भगवान से उनके अमर होने का रहस्य पूछती हैं तब भगवान शिव ने अमरनाथ की गुफा में पार्वती माता को अमरकथा सुनाई थी. भगवान शिव माता पार्वती को कथा सुनाने के लिए ऐसी जगह चाहते थे जहां पर कोई जीव या प्राणी न हो, इसलिए उन्होंने अमरनाथ की गुफा को चुना. गुफा में जाने से पहले भगवान शिव ने एक-एक करके अपने साथ रहने वाले सारे गणो को त्याग कर दिया था. 

भगवान शिव ने सबसे पहले अपने नंदी का त्याग किया, उन्होंने नंदी को जिस सथ्यन पर त्याग किया उस जगह को पहलगाम कहा जाता है. यहां से ही अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है. इसके बाद उन्होंने अपनी जटाओं से चंद्रमा को मुक्त किया, चन्द्रमा जहां मुक्त हुआ उस स्थान को चंदनवानी कहा जाता है. फिर भगवान शिव ने गले में धारण सांपों को छोड़ा, इस जहा को शेषनाग कहा जाने लगा. फिर भगवान शिव ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया, इसके बाद पिस्सू नाम के कीड़े का त्याग किया, उस स्थान को पिस्सू घाटी कहा जाने लगा. 

सभी का त्याग करने के बाद भगवान शिव माता पार्वती के संग अमरनाथ की गुफा में चले गए. इसके बाद उन्होंने माता पार्वती को अमर होने की कथा सुनानी आरम्भ की. ऐसा बताया जाता है की कथा सुनते-सुनते माता पार्वती को नींद आ गई, और भगवान शिव कथा सुनाने में इतने लीं हो गए की उन्होंने देखा ही नहीं की माता पर्वत सो गई हैं. इस दौरान एक कबूतर का जोड़ा वहां मौजूद था जिसने पूरी अमर कथा सुन ली. दोनों कबूतर बीच बीच में गू-गू कर रहे थे, महादेव को लगा शायद पार्वती माता कथा सुन रही है. अमरकथा खत्म करने के बाद भोलेनाथ ने देखा की माता तो सो रही हैं, और वहां दो कबूतर मौजूद हैं. ऐसे में क्रोधित होकर भोले कबूतरों को मारने के लिये आगे बढ़े, तभी कबूतरों ने बोलै, प्रभु हमने पूरी अमरकथा सुन ली है, आप हमे मार देंगे तो अमरकथा  झूटी कह लाएगी. इस पर महादेव दोनों को छोड़ देते हैं और मारा रहने का वरदान देते है. कहा जाता है की आज भी यह कबूतर का जोड़ा भक्तों को दिखाई देता है. 


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