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रातभर में बन कर तैयार हो गए भारत के ये भव्य मंदिर

मंदिरों के देश भारत में जितने मंदिर हैं. उतनी ही कहानियां हैं. जब इन भव्य और प्राचीन मंदिरों का नजारा होता है. आस्था के साथ साथ कुछ सवाल भी उमड़ने लगते हैं. ऐसे सवाल जिनका जवाब मिलना आसान नहीं. क्योंकि अध्यात्म में छुपे ये  वो रहस्य हैं जिन्हें समझना विज्ञान के बस की भी बात नहीं है. 

ऐसा ही एक भव्य मंदिर है वृंदावन का गोविंद देवजी मंदिर. दिखने में अद्भुत, विशाल और बेहद सुंदर. आज की तारीख में अत्याधुनिक मशीनों के साथ इस मंदिर का निर्माण किया जाए तो भी साल गुजर सकते हैं. लेकिन उस दौर में ये मंदिर सिर्फ एक रात में बनकर तैयार रह गया. किंवदंति है कि भूतों और दिव्य शक्तियों ने मिलकर इस मंदिर का निर्माण शुरू किया. शर्त ये थी कि मंदिर का निर्माण सुबह से पहले हो जाना चाहिए. पूरी रात भूत और दिव्य शक्तियां जी जान के साथ मंदिर निर्माण में लगे रहे. सुबह की पहली किरण धरती पर पड़ते ही चक्की उल्टी घूमने लगी. निर्माण सामाग्री मिलना बंद हो गई. मंदिर का निर्माण कार्य रूक गया. वैसे तो ये मंदिर बहुत सुंदर पर कुछ हिस्सों में अधूरा नजर आता है. उसका कारण भी यही है. मंदिर का अधूरापन मंदिर निर्माण के रहस्य को और गहराता है. 

झारखंड स्थित देवघर का मंदिर भी ऐसी ही रहस्यमयी कथाओं को समेटे हुए है. इस मंदिर को भी एक ही रात में पूरा होना था. लेकिन देवी पार्वती का मंदिर बनाते समय निर्माणकर्ता कलाकारी में ऐसे डूबे कि दूसरे हिस्सों पर ध्यान देना ही भूल गए. विशाल मंदिर तो बन कर तैयार हो गया लेकिन प्रवेश द्वार और नहीं बन सके.  नतीजा ये कि इस बड़े से मंदिर में प्रवेश का सिर्फ एक ही द्वार है. पर मंदिर की महिमा अपरंपार है. मध्यप्रदेश में ऐसे दो मंदिर है जिनका निर्माण रातों रात हुआ है. एक है राजधानी भोपाल के पास स्थित भोजपुर का शिवमंदिर. जिसकी विशाल प्रतिमा ने इस मंदिर को पूरी दुनिया के लिए दर्शनीय बना दिया है. कहते हैं कि माता कुंति के लिए पांडवों ने एक ही रात में इस विशाल शिवलिंग का निर्माण किया था. लेकिन मंदिर का गुबंद नहीं रख सके. आज भी तमाम कोशिशों के बावजूद मंदिर की छत खुली ही पड़ी है. ये अब तक रहस्य है कि इतना  बड़ा मंदिर बनाने वाले पांडव गुबंद क्यों नहीं रख सके. और अब भी मंदिर को छत स्वीकार क्यों नहीं है.

मध्यप्रदेश का दूसरा रहस्यमयी मंदिर है मुरैना का ककनमंठ. जहां राजा कीर्ति सिंह ने शिव मंदिर का निर्माण करवाया. शिव के गणों को य मंदिर भी रातों रात तैयार करना था. उन्होंने ऐसी तकनीक से मंदिर बनाया कि बिना चूने के मंदिर के पत्थर आपस में चिपक गए. जिनका संतुलन इतना शानदार है कि धूप, हवा, पानी में भी एक भी पत्थर टस से मस नहीं हुआ. 

उत्तराखंड का पिथौरागढ़ का मंदिर इस मामले में शापित है. इस मंदिर का निर्माण तो रातों रात हो गया. लेकिन मंदिर बनाने वाले गलती से शिवलिंग की दिशा बदल गए. जिसकी वजह से इस मंदिर को शापित माना जाता है. यहां नियमित पूजा पाठ करना अच्छा नहीं माना जाता.


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