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महाभारत के वो श्राप जो कलयुग तक पीछा नही छोड रहे

कहते है आपका इतिहास आपका पीछा नहीं छोडता. कही न कही वर्तमान की नींव भी इतिहास ही है. खासकर हम हिदू धर्म की बात करे तो जिन युगो का वर्णन है. हर आने वाला युग बीते युग की कड़ी के तौर पर रहा है. हिदू धर्म में युगों के साथ-साथ उनके पाप पुण्यों का भी वर्णन है, जिनके बारे में कहा गया है कि युगों-युगों तक साथ चलेंगे. आज हम आपको महाभारत युग के ऐसे ही श्राप के बारे में बताऐंगे, जो कलयुग में भी हमारे साथ हैं न केवल साथ है बिल्कि उन श्रापों को आज भी हम प्रमाण के रूप में देख पा रहे है. 

1 अश्वथामा आज भी जिंदा है - कृष्ण ने अश्वथामा को दिया था श्राप आपने सुना होगा. असीरगढ़ के किले में लोगों ने अस्वाथामा को देखा है. अश्वथामा को कृष्ण ने श्राप दिया था, कि उसकी कभी मृ्त्यु नहीं होगी. क्योंकि अश्वाथामा ने जब महाभारत युद्द अपने अंतिम चरण में था, तब अस्वथामा ने धोखे से पांडव पुत्रों को गर्भ में मार डाला था. तब श्रीकृष्ण ने अश्वथामा को श्राप दिया कि तुमने जन्म देखा है, लेकिन तुम कभी मृत्यु नहीं देख पाओगे. श्राप देते हुए कृष्ण ने अश्वाथामा के सिर पर लगी मणि भी निकाल ली. कहते है कि आज भी अश्वथामा असरीगढ़ के किले में घूमता देखा जाता है. 

2 उर्वशी का अर्जुन को श्राप - महाभारत काल में एक बार अर्जुन दिव्यास्त्र पाने के लिए स्वर्ग लोक गए थे. स्वर्गलोक में उर्वशी नाम की एक अप्सरा उन पर आकर्षित हो गई. उर्वशी ने अर्जुन से अपनी मन की बात कही. जिससे अर्जुन ने साफ मना कर दिया और कहा कि आपके साथ हमारे वंशजों ने वंश आगे बढ़ाया है. इसलिए आप हमारी माता समान है. ऐसे में उर्वशी ने अर्जुन को नपुंसक होने का श्राप दे दिया. महाभारत युद्द खत्म होने के बाद माता कुंती ने अपने बेटों को बताया कि कर्ण उनका ही भाई था. ये सुनने के बाद पांडवों ने कर्ण का अंतिम संस्कार विधि-विधान के साथ कर दिया. लेकिन ये बात पांडवों को बहुत बुरी लगी और युधिष्ठिर ने पूरी कुंती को श्राप देते हुए कहा कि पूरी स्त्री जाति अब कभी कोई बात किसी ने नही छुपा सकेगी. युधिष्ठिर ने कहा कि आज से कोई भी स्त्री किसी भी प्रकार की गोपनीय बात का रहस्य नहीं छुपा पाएगी.

3 माण्डव्य ऋषि का यमराज को श्राप - महाभारत में एक चरित्र था विदुर का जिसे बहुत नीतिवान और ज्ञानवान माना जाता था. वो कोई और नही बल्कि स्वयं यमराज थे, जो मांडव्य ऋषि के श्राप के कारण मनुष्य रूप में जन्मे थे. कहते है एक बार राजा ने गलती से ऋषि मांडव्य को चोर समझ कर सूली पर चढ़ाने का आदेश दिया. ऋषि मांडव्य को सूली पर चढ़ाया गया. लेकिन कई दिनों तक उनके प्राण नहीं निकले तो राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ. लेकिन इस बात का श्राप ऋषि मांडव्य ने मृत्यु के देवता यमराज को दिया और कहा कि तुमकों भी मनुष्य रूप में जन्म लेना होगा.

4 श्रृंगी ऋषि का परीक्षित को श्राप - जब पांडव स्वर्गलोक की और प्रस्थान करने निकले तो उन्होंने अपना सारा राज्य अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित के हाथों में सौंप दिया. राजा परीक्षित के शासन काल में सभी प्रजा सुखी थी. लेकिन एक बार शिकार करते राजा बहुत दूर निकल गए जब उन्होंने श्रृंगी ऋषि से कुछ जानना चाहा, तो मौन में उन्होंने कोई जवाब नही दिया. राजा परीक्षित ने गुस्से में आकर उनके गले में मरा हुआ सांप डाल दिया. उसके बाद राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सात दिन में उनकी मृत्यु तक्षक नाग के डसने से होगी.


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