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सावन सोमवार का पहला दिन आज, रखें इन बातों का ध्यान

भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना सावन आज से शुरू हो गया है. इस पावन महीने का भक्त साल भर इंतज़ार करते हैं . कहते हैं इस महीने में भगवान शिव की आराधना करने से मन इच्छा फल प्राप्ति होती है. सावन के इस पावन महीने में भगवान शिव अपने भक्तों पर सदा ही कृपा बनाए रखते हैं. ऐसी मान्यताएं हैं की इस महीने में उपवास करने वाले व्यक्तियों की सभी मनोकामनाएं शिव भगवान पूरी करते हैं. 

ऐसा कहा जाता है की अगर सावन के महीने में कुंवारी युवतियां व्रत रख कर भगवान शिव को प्रसनन करती हैं तो उन्हें, उनकी इच्छा अनुसार वर की प्राप्ति होती है. हिन्दू धर्म के पुराणों में ऐसा लिखा गया है की माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे श्रावण मास में कठोर तप किया था. तब जाकर उन्हें भगवान शिव पति रूप में हासिल हुए थे. इसलिए युवतियों के लिए इस मास में उपवास करना काफी लाभकारी होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं की भगवान शिव की आराधना करते समय कुछ बातों का ध्यान रखने की हमे विशेष ज़रुरत होती है. ज़रा सी भी भूल चूक से भगवान शिव नराज़ हो सकते हैं. आइये जानते हैं की हमे किस बातों का ध्यान रखने की बहुत ज़्यादा ज़रुरत है. 

सावन के महीने में किसी भी प्रकार के मास-मच्छी का सेवन नहीं करना चाहिए. आपका भोजन सात्विक होना चाहिए, साथ ही आपके भोजन में लहसुन और प्याज़ का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. 

इस महीने में आप सब्जियों का अगर सेवन करते हैं तो उसमे बैगन का सेवन ना करें. बैगन को एक अशुद्ध सब्जी माना जाता है. इसलिए इसका इस्तेमाल न करें.

इस दौरान सभी लोग शिवलिंग का दूध और दही से अभिषेक करते हैं. इसलिए इस महीने में आप दूध और दही के सेवन करने से भी परहेज करें.

 

पूजा में इन बातों का रखें ख्याल

भगवान शिव को बेलपत्र, भांग और धतूरा काफी प्रिय होता है. लेकिन कुछ चीज़ें ऐसी भी हैं जिन्हे चढ़ाने से हमे परहेज़ करना चाहिए. शिवलिंग पुरुष तत्व से संबंधित है, इसलिए इस पर हमे हल्दी चढ़ाने से बचना चाहिए.

साथ ही भगवान शिव को इत्र काफी अच्छा लगता है, इसलिए इत्र का इस्तेमाल करना न भूलें. इत्र के चढ़ावे से भगवान शिव बेहद प्रसनन होते हैं. इसलिए इत्र ज़रूर चढ़ाएं.

भगवान शिव को कभी भी टूटे हुए चावल ना चढ़ाएं. भोले भगवान को सदा ही बिना टूटे हुए और साफ़ चावल चढ़ाने चाहिए. 

शंख के द्वारा गलती से भी भगवान शिव को जल ना चढ़ाएं. शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव ने एक शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था. शंख उसी असुर का प्रतीक माना जाता है. इसलिए शंख से कभी भी भगवान शिव को जल न चढ़ायें. हमेशा तांबे के बर्तन में जल भरकर भगवान को चढ़ाना चाहिए. 

 


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