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34 साल बाद शिक्षानीति में बदलाव, मिली मंजूरी

एजूकेशन डेस्क : देश में 34 साल बाद शिक्षानीति में बदलाव किए गए है. नई शिक्षानीति को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. नई शिक्षा नीति में सरकार ने कई बदलाव किए गए है, जिसमें स्कूल के बस्ते, रिपोर्ट कार्ड, यूजी एडमिशन शामिल है. नई शिक्षानीति में स्कूली शिक्षा, कृषि शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा को इसके दायरे में लाया गया है. नई शिक्ष नीति 2020 की जानकारी केंन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और मंत्री प्रकाश जावडेकर ने दी है.

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत पांचवी कक्षा तक मातृभाषा और स्थानीय, क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई कराए जाने की बात कही है और इसे कक्षा आठ तक बढ़ाया जा सकता है. विदेश भाषाओं में पढ़ाई सेकेंडरी से की जाएगी किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाएगा. साल 2030 तक माध्यमिक स्तर तक एजुकेशन फॉर ऑल का लक्ष्य रखा गया है. प्री स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा और तीन साल की आंगनवाड़ी होगी. पहली स्टेज में तीन साल की प्री-प्राइमरी और दूसरी स्टेज में पहली तथा दूसरी कक्षा को रखा गया है. और तीसरी स्टेज में तीसरी, चाैथी और पाँचवी कक्षा को रखा गया है. 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा पहले की तरह जारी रहेगी.

नई शिक्षा नीति के तहत 2030 तक हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. अब राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण में सरकारी और निजी स्कूल शामिल होंगे. इससे निजी स्कूलों की फीस पर लगाम लगेगी. पिछडे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के लिए स्कूलों में नाश्ता दिया जाएगा. स्कूलों में अबतक मिड-डे-मील के तहत दोपहर में भोजन मिलता था, लेकिन अब इसी साल से स्कूलों में नाश्ता भी दिया जाएगा. साथ ही स्कूलों में शारीरिक जांच के लिए सभी छात्रों को हेल्थ कार्ड भी दिया जाएगा. 

शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए हर पांच साल में समीक्षा की जाएगी. 2022 के बाद से स्कूलों में पैराटीचर नहीं रखे जाएंगे. भर्ती सिर्फ नियमित शिक्षकों की होगी. शिक्षकों के रिटायरमेंट के पांच साल पहले नियुक्ति का काम केंद्र और राज्य शुरू कर देंगे. ऑनलाइन शिक्षा को जोर दिया जाएगा. ई-शिक्षा ऐसी जगाहों पर दी जाएगी, जहां पारंपरिक और व्यक्तिगत साधन नहीं है. ऑनलाइन शिक्षा के लिए नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम बनाया जाएगा.

बता दे की नई शिक्षा नीति 2020 के लिए करीब 2.5 लाख पंचायतों, 6,600 ब्लॉकों और 676 जिलों से सुझाव मिले थे. जिसके बाद 2016 मई में पूर्व कैबिनेट सचिव सुब्रमण्यन की कमेटी ने रिपोर्ट पेश की थी, जिसके बाद 2017 में इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता समिति गठित की गई और 31 मई, 2019 को रिपोर्ट सौंपी गई.


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