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आखिर डिजिटल इंडिया में बंद क्यों किया जाता है इंटरनेट, जानिए

डिजिटल इंडिया के युग में जब इंटरनेट को बंद कर दिया जाता है तो क्या होता है.. किन चीज़ो पर असर पड़ता है.. और इंटरनेट बंद करने की प्रतिक्रिया कितनी सवैंधानिक है ..इस खबर में पढ़िए...

इंटरनेट बंद क्यों किया जाता है?

ताकि शांति बनाई रखी जा सके. हालात बेकाबू न हों. इंटरनेट के ज़रिए क्रिटिकल इनफॉर्मेशन (संवेदनशील सूचनाएं) बाहर न भेजी जा सकें. अफवाहें न फैलाई जा सकें. फ़ेक तस्वीरों या गलत ख़बरों के साथ. मेघालय में रिलीज हुए ऑफिशियल मेमो में कारण बताया गया था..

कैसे बंद किया किया जाता है इंटरनेट?

क्या सरकार के पास कोई स्विच होता है? जिसे ऑफ किया तो इंटरनेट बंद हो जाएगा? जवाब है, नहीं. सरकारें इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को निर्देश भेजती है, कि वो इंटरनेट सेवाएं बंद कर दें. अगर सरकारी टेलिकॉम कंपनी है तो कंट्रोल सरकार के अपने हाथ में है. प्राइवेट कंपनी है, तो भी लाइसेंसिंग सरकार की ही होती है. इसलिए वो कंपनियां भी सरकारी आदेशों को अनदेखा नहीं करतीं. और जिस क्षेत्र में कहा गया है, वहां का इंटरनेट बंद कर देती हैं.

इसके दो तीन तरीके हैं.

पहला, इंटरनेट कनेक्टिविटी के जो डिवाइस लगे होते हैं कंपनी के पास, उनको बंद कर दिया जाता है. इस तरह उस क्षेत्र का इंटरनेट पूरी तरह बंद हो जाता है. दूसरा, कुछ चुनिंदा वेबसाइट्स को बैन करना. जैसे पॉर्न साइट्स, या फिर खतरनाक स्पैम वाली साइट्स....

क्या इसके लिए कोई नियम भी हैया सरकार ऐसे ही इंटरनेट बंद कर सकती है?

# 2017 में नियम आया. The Temporary Suspension of Telecom Services (Public Emergency or Public Safety) Rules. राज्यों के गृह मंत्रालय ही अधिकतर जिम्मा उठाते हैं. इंटरनेट बंद करने का. उसके लिए इसी कानून का सहारा लिया जाता है...

#इससे पहले धारा 144 लगाकर इंटरनेट बंद किया जाता था. इसका इस्तेमाल सार्वजनिक जगहों पर शान्ति बनाए रखने के लिए किया जाता है. डीएम या एसडीएम इसके तहत निर्देश दे सकते हैं. इंटरनेट बंद करना इसी में शामिल है...

इसका नुकसान क्या होता है?

Indiaspend नाम की वेबसाइट के अनुसार 2011 से 2017 तक तकरीबन 16,000 घंटों तक इंटरनेट शटडाउन रहा भारत में. इसमें देश का तकरीबन 213.36 अरब रुपयों का नुकसान हुआ. कश्मीर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका है...

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, साल भर में, जुलाई 2015 से जून 2016 तक, इंटरनेट शटडाउन की वजह से पूरी दुनिया में ढाई बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ.... 


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