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पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पिछड़ा भारत

भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही हिचखोले खा रही है. अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आने के बाद रेटिंग एजेंसी और जीडीपी अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी में और गिरावट आने का अनुमान जताया है, तो वही भारत के कर्ज को लेकर एक और रिपोर्ट सामने आई है. महामारी के दौर में लगाई गई पूणबंदी का साफ असर भारत की अर्थव्यवस्था पर देखा गया साफ है की स्वास्थ्य मुसिबत के दौरा में सरकार की आय में गिरावट आई और तमाम योजनाएं के लिए कर्ज लेकर खर्च करने के चलते यह स्थिति पैदा हुई है. 

पहले जहां जीडीपी में भारी गिरावट आई तो, इंटरनेशनल माॅनिटरी फंड वल्र्ड इकोनाॅमिकी आउटलुक की रिपोर्ट बताती है की जीडीपी के मुकाबले भारत का कुल सरकारी कर्ज 90 फीसदी के बराबर हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में जीडीपी के मुकाबले भारत का कुल कर्ज 89.3 पर्सेंट हो सकता है. इससे पहले 2003 में भारत पर कर्ज जीडीपी के मुकाबले 84.2 पर्सेंट था. यानी ऐसा पहली बार है जब पर कर्ज जीडीपी के मुकाबले इतना ज्यादा होगा. पांच साल पहले 2015 में भारत का कर्ज जीडीपी के मुकाबले 68.8 पर्सेंट था जबकि 2019 में यह आंकड़ा 72.3 पर्सेंट ही था.

गौरतलब है की भारत उभरते देशों में सबसे ज्यादा कर्ज बाला देश है. दक्षिण एशिया की बात की जाए तो भूटान और श्रीलांका के बाद भारत पर जीडीपी की तुलना में सबसे ज्यादा कर्ज है. इतना ही नहीं बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल जैसे पड़ोसी देश भी भारत की तुलना में ज्यादा अच्छी स्थिति में है. आपकों बता दें की हाल ही में अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने एक अनुमान में कहा था की भारत प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में 2020 में बांग्लादेश से भी पिछड़ सकता है. अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2020 में 4 परसेंट की दर से बढ़ते हुए 1888 डाॅलर के लेवल पर पहुंच सकती है. वहीं भारत में प्रति व्यक्ति जीडीपी 10.5 फीसदी की गिरावट के साथ 1877 डाॅलर तक गिर सकती है.

हालांकी अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अलगे साल यानी 2021 में भारत की तेज रिकवरी का अनुमान लगाया है. जिसकी वजह से 2021 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी फिर बांग्लादेश से मामूली अंतर से आगे निकल जाएगी. 2021 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी डाॅलर के हिसाब से 8.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जबकि बांग्लादेश की 5.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है. इस हिसाब से 2021 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2030 डाॅलर होगी. लेकिन फिलहाल तो भारत के लिए कर्ज में डूबने की स्थिति से पार पाना ही सबसे बड़ी रिकवरी होगी.


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