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सरकार को ही नहीं पता किसने बनाया आरोग्य सेतु एप

मोदी सरकार के डिजिटल इंड़िया का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकार आप भी सोचने को मजबूर हो जाएंगे. हम बात कर रहे है आरोग्य सेतू एप की. जिसे आप भलीभांती जानते ही होंगे. जिसका प्रचार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने करोड़ो रूपये खर्च कर डाले. कोरोना काल में मोदी सरकार और उनके मंत्रियों ने कहा था की संक्रमण से बचाने में आरोग्य सेतू एप आपकी मदद करेंगा. मोबाईल में डाउनलोड करने से आरोग्य सेतू एप आपकों कोरोना वायरस से सुरक्षित रखेगा. रेलवे स्टेशनों से लेकर हावाई अड्डों पर आरोग्य सेतू एप के बिना एंट्री नहीं दी जा रही थी. इतना ही नहीं सरकार ने यह तक फरमान जारी कर दिया था की बिना आरोग्य सेतू एप के पाए जाने पर जुर्माना भी लग सकता है. लेकिन एक खुलासे में पता चला है की आरोग्य सेतू एप किसने बनाया, यह बात मोदी सरकार को ही नहीं पता. 

जी हां मोदी सरकार और उनके अधिकारियों को ही नहीं पता की यह एप किसने बनाया है और जब पता ही नहीं तो सरकार में इस एप की फाइल किसने पास कर दी. दरअसल, सूचना के अधिकार के तहत मोदी सरकार से सवाल पूछा गया था की आरोग्य सेतू किसने बनाया, कब बनाया और कितना खर्चा आया. इस एप को बनाने में, इस एप को चलाता कौन है, तो पूरा डिजिटल इंड़िया चलाने वाला नेशनल इंफाॅरमेसन सेंटर ने कहा की हमे नहीं पता की आरोग्य सेतू एप किसने बनाया, हम नहीं जानते. वहीं आरोग्य सेतू एप की वेबसाइट पर देखा जाए तो साफ अक्षरों में लिखा है की आरोग्य सेतू एप को नेशनल इंफाॅरमेसन सेंटर चलाता है. लेकिन सरकार को कुछ नहीं पता की आखिर आरोग्य सेतू एप चला कौन रहा है. 

बता दें की यह आरटीआई सौरभ दास नामक युवक ने लगाई थी. आरटीआई में पूछा गया था की आरोग्य सेतू एप किसने बनाया, कितना खर्चा आया, इसे कौन चलाता है. जिसके जबाव में नेशनल इंफाॅरमेसन सेंटर ने कहा की हमे नहीं पता यह एप किसने बनाया, हम नहीं जानते. जिसके बाद केन्द्रीय सूचना आयोग ने नेशनल इंफाॅरमेसन सेंटर से जबाव मांगा. केन्द्रीय सूचना आयोग ने मिनिस्ट्र आफ इलेक्ट्रानिक्स, नेशनल इंर्फोमेटिक सेंटर सहित कई विभागों को कारण बताओं नोटिस भेज दिया. आरोग्य सेतू एप पर हुए विवाद के बाद सरकार ने कहा है कि नेशनल इंफाॅरमेसन सेंटर ने उद्योग और शैक्षणिक सेंटर के वालेंटियर के सहयोग से यह एप तैयार किया गया. अब भले ही सरकार लाख सफाई पेश कर ले, लेकिन यह तो तय हो गया है की नेशनल इंफाॅरमेसन सेंटर को नहीं पता की एप को बनाया किसने.


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