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कर्नाटक के बाद इन राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन तय!

कर्नाटक के बाद इन राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन तय!

कर्नाटक में राजनैतिक पंडितों द्वारा कई महिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं. केंद्र द्वारा उन्हें इस्तीफे के लिए आदेशित किया जा सकता है. आखिरकार अपने कार्यकाल के दो साल पूरे करने के बाद येदियुरप्पा ने सीएम की कुर्सी छोड़ दी है. ठीक इसी तरह वर्तमान में कई और भी ऐसे राज्य हैं जिनके मुख्यमंत्रियों की कुर्सी पर संकट के बादल प्रत्यक्ष तौर पर देखे जा सकते हैं. बीते घटनाक्रमों को अगर गौर से टटोला जाए तो तीन ऐसे राज्य हैं जिनमें नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है. क्योंकि देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी येन केन प्रकरेण राज्यों में सरकार बनाने में माहिर है. मुश्किल से बनाई गई राज्य सरकारों पर कोई संकट आता है तो केंद्र नेतृत्व परिवर्तन जैसे बड़े फैसले लेने को बाध्य हो जाता है. 

मध्यप्रदेश : शिवराज सरकार में अंतर्विरोध

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार है. बीते कुछ समय से देखा जा रहा है कि मध्यप्रदेश की राजनीति में दिग्गजों का दिल्ली से लेकर भोपाल में एक के बाद एक मेल-मुलाकातों का दौर जारी है. शिवराज सिंह बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले.  प्रहलाद पटेल से दिल्ली पहुंचकर कैलाश विजयवर्गिय मिले, इस मुलाकात के बाद पटेल से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और सुहास भगत की भी मुलाकात कर चर्चा हुई. गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा दिल्ली पहुंचकर कैलाश विजयवर्गीय और प्रभात झा से मिले. इन मुलाकातों में सबसे खास बात ये रही कि ये सारे दिग्गज नेता शिवराज विरोधी गुट के माने जाते हैं.
2020 में कमलनाथ सरकार गिराने में मिश्रा कि अहम भूमिका रही थी. मुख्यमंत्री बनने की कतार में नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल हैं. इस बार ऐसा लग रहा है कि शिवराज सिंह को लेकर भारी विरोध है, पार्टी में भी और जनता में भी. इसलिए ऐसा माहौल बन रहा है कि सीएम को बदला जाए.

त्रिपुरा : सीएम बिप्लब देब के विरोध में विधायक

60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन में भाजपा के 36 विधायक हैं और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ;आईपीएफटीद्ध के 8 विधायक हैं. यहां मुख्यमंत्री बिप्लब देब की सरकार है. हालांकि त्रिपुरा में बिप्लब की कुर्सी पर खतरा संकट के निशान से उपर चला गया है. यहां सीएम के खिलाफ विधायकों का खुलकर विरोध देखने को मिला है.

विधायकों का एक समूह त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने दिल्ली गया था. भाजपा के नाराज और उपेक्षित नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर जल्द ही संगठनात्मक स्तर पर सुधार के साथ परिवर्तन की मांग की है. हालांकि, केंद्र ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और राज्य प्रभारी विनोद सोनकर से इस मुद्दे को हल करने के लिए कहा गया. गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनावों में माणिक सरकार की कम्युनिस्ट सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद भाजपा ने राज्य में सत्ता में वापसी की थी. हालांकि भारी विरोधों को देखते हुए वर्तमान में बिप्लब की कुर्सी तो खतरें में ही नजर आ रही है.

हरियाणा : खट्टर सरकार पर मंडरा रहा संकट

हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार है. जोकि किसान आंदोलन के कारण खतरे में है. दरअसल यहां 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत तो नहीं पा सकी लेकिन उसने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी यानी जजपा के 10 विधायकों के समर्थन से हरियाणा में सरकार बना ली. जजपा को ग्रामीण इलाक़ों में वोट मिला था जो किसान मज़दूरों का वर्ग माना जा रहा है. किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं. हरियाणा सरकार किसानों को साधने में पूरी तरह नाकाम रही नतीजतन किसान उनकी सरकार से खफा हो गए.

ऐसे में जजपा के सपोर्ट के बनी सरकार में जजपा को किसानों का घोर समर्थन मिलता है. ऐसे में जब सरकार किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम उठाने में विफल रही तो किसानों के अंदर जजपा के लिए भी विरोध शुरू हो गया. कुछ समय पहले जींद ज़िला जहां जजपा का गठन हुआ था, वहां की खापों ने एक मीटिंग करके जजपा विधायकों से मिलकर भाजपा से गठबंधन तोड़ने का प्रेशर बनाने की बात कही थी. खाप की मीटिंग में फ़सल और नस्ल बचाने की मुहीम में पंजाब के किसानों का साथ देने की अपील के साथ भाजपा को सबक़ सीखाने की बात पर भी फ़ैसला हुआ था. खट्टर सरकार के लिए किसानों में गुस्सा और राज्य सरकार पर संकट को देखते हुए केंद्र यहां नेतृत्व परिवर्तन कर सकता है.


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