क्या सचमुच ये वजह है मध्यप्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल की

मध्यप्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकले तेज हो चुकी है. लेकिन सबसे बडा सवाल है कि आखिर अचानक कोरोना की लहर खत्म हुई और पार्टी किसी और की ताजपोशी क्यों करना चाहती है. ये बात किसी के गले नहीं उतर रही. जब शिवराज सिह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री बने थे, तब कहीं न कहीं ये माना जा रहा था कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी किसी अनुभवी चेहरे को ही कमान देना चाहते है. इसलिए तमाम विरोधों के बाद भी शिवराज सिह चौहान को चौथी बार कमान दी गई. 

एक साल बीतने के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि शिवराज के चेहरे को बदलने की अटकले तेज हो गई है. दरअसल, इसके पीछे कारण तो कई है, लेकिन इन कारणों को अभी तक आलाकमान नजरअंदाज कर रहा था. और उसकी नजर में शिवराज सिंह चौहान का चहेरा ही बेहतर था. लेकिन फिर क्या ऐसा हुआ कि अचानक आलाकमान की तिरछी नजर शिवराज के ऊपर आ गई. दरअसल, इस कहानी की शुरूआत हुई उन खबरों के साथ जिसमें पीएम केयर फंड को लेकर तमाम तरीके की खबरें मीडिया के बीच आई. 

लगातार कुछ दिन ये बातें होती रही कि पीएम केयर पंड की तरफ से दिए गए वेंटिलेटर खराब पीएम केयर फंड में धांधली हुई है. इसी दौरान इस फंड को लेकर लगी सारी आरटीआई (RTI) सामने आई. सूत्रों की माने तो इन सारी आरटीआई में से तकरीबन सौ आरटीआई मधयप्रदेश से लगी है. जब और गहराई तक तफ्तीश कि गई तो पता चला कि इन सारी आईटीआई को लगवाने के पीछे शिवराज के एक खास अफसर का हाथ है. तो यही बात बिगड़ गई. अगर बीजेपी शासित राज्य से पीएम केयर फंड को लेकर इतने सवाल खडें हो और दर्जनों आरटीआई लगे तो कहीं न कहीं बात पार्टी फोरम पर पहुंची और उसे गंभीरता से लिया गया. 

खबर ये है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को दिल्ली जाऐंगे और इस पूरे मामले पर अपनी सफाई भी देंगे. इसी दौरान मध्यप्रदेश बीजेपी के नेताओं ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करना शुरू कर दिया है. बुधवार के बाद अब पता चलेगा कि चौदह साल तक मध्यप्रदेश की जनता पर एकछत्र राज्य करने वाले शिवराज का राजयोग इसी तरह चलेगा या फिर करीबी अफसर की नादानी से उनके राजयोग पर ग्रहण लग जाएगा.


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