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क्या सिंधिया का फॉमूर्ला अपनाना चाहते है नवजोत सिंह सिद्धू

क्या सिंधिया का फॉमूर्ला अपनाना चाहते है नवजोत सिंह सिद्धू

क्या सिंधिया का फॉमूर्ला अपनाना चाहते है नवजोत सिंह सिद्धू

पंजाब कांग्रेस की कलह अब रफ्तार पकड़ चुकी है. सिद्धू ने एक बार फिर पंजाब ही नहीं पूरी कांग्रेस को हिला के रख दिया है. सिद्धू ने दो महीने में ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ दे दिया. इतना ही नहीं जिस तरह से मध्यप्रदेश में सिंधिया के समर्थन में उनके समर्थकों ने सरकार से इस्तीफा दिया था. उठी उसी तरह सिद्धू के समर्थन में पंजाब कैबिनेट की एक मंत्री और तीन संगठन के नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. सिद्धू ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा है कि वह पंजाब की भलाई के लिए उनकी लड़ाई है और वह इससे कभी समझौता नहीं करेंगे. मैं हमेशा आलाकमान की राह पर चला, लोगों के मुद्दों के लिए लड़ा. लेकिन यहां दागी नेताओं और अफसरों से व्यवस्था सौंप दी. सिद्धू के बयान से साफ है कि वह सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम बनने से खुश नहीं है. उनके बयान से यह भी साफ होता है कि सिद्धू खुद मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते है.

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सिद्धू की इस सियासी लड़ाई को मध्यप्रदेश की सियासत से जोड़ा जाए, तो ऐसा लगता है कि सिद्धू ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर चल रहे है. दरअसल, पंजाब के जो हालात है वैसे ही हालातों का सामना कांग्रेस को 2020 में मध्यप्रदेश में करना पड़ा था. जहां एक तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया थे और वही दूसरी तरफ कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेता थें. सिंधिया मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. लेकिन आलाकमान ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया. फिर भी सिंधिया सियासी अपमान का घूंट पी गए. सिंधिया ने फिर प्रदेश अध्यक्ष बनने की चाहत रखी, लेकिन उनकी कोई भी चाहत पूरी नहीं हो पाई. इसके बाद सिंधिया ने 15 साल का वनवास काटकर आई, कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को दो साल में ही गिरा दिया. सिंधिया अपने समर्थक विधायको के साथ बीजेपी में शालिम हो गए और शिवराज की सरकार बनवा दी.

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राजनैतिक जानकारो की माने तो सिद्धू सिंधिया की राह पर चलते दिखाई दे रहे है. क्योंकि सिंधिया जनता की भलाई का हवाल देते हुए सड़कों पर उतरे थे, यहां भी सिद्धू ने पंजाब और पंजाब के लोगों की भलाई की बात कही है. कहीं ऐसा तो नहीं कि सिद्धू भी सिंधिया की तरह अपने विधायकों को लेकर पार्टी से बगावत कर सरकार गिरा दे. फिलहाल कांग्रेस आलाकमान सिद्धू को समझाने उन्हें मनाने में जुटा हुआ है. लेकिन सिद्धू अपनी जिद पर अड़े है. जिस तरह से मध्यप्रदेश में सिंधिया अपनी जिद पर अड़ गए थे.


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