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Maharashtra में Sharad Pawar का बड़ा गेम, Maha vikash Aghadi सरकार होगी फेल!

Maharashtra में Sharad Pawar का बड़ा गेम, Maha vikash Aghadi सरकार होगी फेल!

ज्यादा दिन नहीं बीते 28 नवंबर 2019 का दिन था जब महाराष्ट्र में महाविकास की सरकार बनी. गठबंधन सरकारों में नया इतिहास लिखा था, इस सरकार ने. नेतृत्व को लेकर बवाल हुआ और राजनैतिक साथी बदल गए. उद्धव ठाकरे की सरकार शदर पवार की एनसीपी के समर्थन से बनी.

महाराष्ट्र में रातों-रात क्या हुआ-

आपको वो वाकया भी याद होगा कि जिसमें रातों-रातों उद्धव ठाकरे की जगह देवेन्द्र फडनवीस मुख्यमंत्री बन गए, लेकिन उस समय भी शरद पवार मजबूती के साथ खडे रहे और उद्धव ठाकरे सरकार को गिरने नहीं दिया.

संकट मोचक पवार का खेल-

लेकिन पिछले दिनों जो सबकुछ देखने सुनने को मिल रहा है, लगता है सरकार के संकट मोचक रहे शरद पवार ही महाअगाडी सरकार पर संकट न खडा कर दें.

ताजा मामला है वैक्सीन का. वैक्सीन को लेकर शरद पावरा और उद्धव ठाकरे के सुर बदले-बदले हैं. उद्धव ठाकरे के स्वास्थ्य मंत्री के बयान ने केंद्र को वैक्सीन की कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन शरद पवार उद्धव ठाकरे के मंत्री के बयान से इत्तेफाक नहीं रखते. महामारी के दौर में वैक्सीन पर राजनीति और उस पर भी गठबंधन सरकार में दलों की अलग-अलग राय.

ठाकरे ने रखे नाप-नापकर कदम-

महाराष्ट्र सरकार जब से बनी है, तब से ये बात तो तय है कि शरद पवार को लेकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हमेशा इस बात का ध्यान रखते हैं कि पवार उनके किसी फैसले से नाराज न हो जाएं.

हिंसक घटना-

इससे पहले भी कई ऐसे मौके आए जब शरद पवार और उद्धव ठाकरे के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए. मतभेद की शुरुआत भीमा कोरेगांव को लेकर हुई. जब भीमा कोरेगांव मामले की जांच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एनआईए को सौंप दी. उसके बाद एनसीपी के दवाब के चलते सरकार को पैसला वापस लेना पड़ा और इसकी जांच राज्य सरकार की स्पेशल टास्क फोर्स ने शुरू की.

NRC-CAA को ठाकरे का समर्थन-

उसके बाद मामला आया सीएए और एनआरसी को लेकर. सीएए और एनआरसी के मामले में उद्दव ठाकरे ने सीएए को सही ठहराया और कहा कि ये किसी को देश से बाहर निकालने का कानून नहीं है. मुख्यमंत्री इस कानून को राज्य में लागू करना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस और एनसीपी ने इसका खुलकर विरोध किया.

संजय बर्वे का एक्सटेंशन-

फिर पुलिस कमीश्नर संजय बर्वे के एक्सटेंशन पर शिवसेना ने आपत्ति जताई तो राज्यसभा की सीट को लेकर भी एनसीपी और शिवसेना मतभेदों के साथ आमने सामने रहे. फिर वानखेडे स्टेडियम के 200 करोड़ बकाया को लेकर शिवसेना और एनसीपी के बीच मतभेद मीडिया में सुर्खियां रहे.

एंटीलिया मामला-

इस बीच सचिन वाजे का एंटीलिया मामला, अनिल देशमुख का वसूली कांड में इस्तीफा और सीबीआई जांच के तमाम घटनाक्रमों के बीच शदर पवार, प्रफुल्ल पटेल, अमित शाह के साथ गुजरात में हुई मीटिंग जिसके बाद शरद पवार ने चुप्पी साध ली.

महामारी से जूझ रहा महाराष्ट्र-

अब देश एक महामारी से जूझ रहा है. महामारी के हाल महाराष्ट्र में कुछ ऐसे हैं कि वो संक्रमण के मामले में विश्व में तीसरे पायदान पर पहुंच चुका है. ऐसे में वैक्सीन को लेकर केंद्र और राज्य के बीच राजनीति गरमा रही है. उद्धव के मंत्री इसके लिए केंद्र को दोष दे रहे हैं तो वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि केंद्र सरकार वैक्सनी की पूरी पूर्ति की कोशिश कर रही है.

महाराष्ट्र सत्ता पलट-

लगता है बंगाल चुनाव के बाद वैक्सीन के ये बदले सुर अब सत्ता पलट न कर दें. मतलब साफ है, लगातार मतभेद का सामना कर रही एनसीपी की राह अलग हो सकती है. एनसीपी-शिवसेना से समर्थन वापस लेकर बीजेपी के साथ खड़ी हो सकती है. पिछले दिनों अमित शाह और शरद पवार की मुलाकात संकेत दे रही है कि कुछ पक रहा है और राजनीति के तवे पर, अब समर्थन की रोटी कभी भी पलटी जा सकती है.

 


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