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विधायकों के इस्तीफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

विधायकों के इस्तीफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

कोई विधायक यदी विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपता है, तो क्या अध्यक्ष को उसका इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लेना चाहिए या फिर इस्तीफे की पूरी जांच करने के बाद विधायकों को कुछ समय देना चाहिए. विधायकाें के इस्तीफे की प्रक्रिया क्या है. इसी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है.

विधानसभा अध्यक्ष क्या बिना जांच किए किसी विधायक का इस्तीफा स्वीकार कर सकते है. इस्तीफे को तत्काल स्वीकार करने का क्या विधानसभा अध्यक्ष को अधिकार है. यह सवाल मणिपुर विधानसभा के एक मामले से उठा. जहां तीन बीजेपी विधायकों ने 17 जून 2020 अचानक अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. इन तीनों बीजेपी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र भेजा जो अपने हाथों से लिखा था. इस्तीफा देने के बाद तीनों ही विधायकों ने एक पत्रकार वर्ता की और इसे सार्वजनिक कर दिया है. 17 जून की शाम को ही विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए और अगले ही दिन 18 जून 2020 को इस संबंध में एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया.

तीन विधायकों के इस्तीफे से वीरेन्द्र सिंह सरकार अल्पमत में आ गई. इसके बाद राज्यपाल ने वीरेन्द्र सिंह से बहुमत साबित करने के लिए कहा वीरेन्द्र सिंह ने विपक्षी दलों में सेंधमारी कर बहुमत भी साबित कर दिया है. इसी बीच इस्तीफा देने वाले विधायकों ने मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए कहा की विधानसभा अध्यक्ष ने बिना जांच किए उनके इस्तीफे स्वीकार किए है. उन्होंने इसकी जांच नहीं की के विधायकों ने इस्तीफे किसी दबाव में तो नहीं दिए. लेकिन 13 जुलाई 2021 को विधायकों की याचिका पर को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा की यदि इस्तीफे वास्तविक और स्वेच्छिक है तो उन्हें स्वीकार करने में स्पीकर की ओर से गलती नहीं है. 

हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया की यदि विधायकों का इस्तीफा किसी दबाव में दिया गया था तो क्या उनकी ओर से कोई शिकायत की गई. जब कोई शिकायत नहीं की गई तो इसे दबाव में कैसे माना जा सकता है. प्रक्रिया और कार्य के नियमन के नियम और संविधन के अनुच्छेद के तहत स्पीकार इस बात की जांच कर सकते है, कि क्या विधायकों ने स्वेच्छा से अपना इस्तीफा दिया है. लेकिन ये जांच कैसे होगी, किस प्रकार होगी. यह कोर्ट तय नहीं करेगा. ये काम विधानसभा अध्यक्ष का है. इसी के साथ कोर्ट ने विधायकों की याचिका को खारिज कर दिया.


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