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मेघालय में कोरोना वारियर डॉक्टर के साथ लोगों ने किया ऐसा काम

मेघालय में कोरोना वारियर डॉक्टर के साथ लोगों ने किया ऐसा काम

लंबे विवाद के बाद आखिरकार मेघालय में कोरोना वायरस से मरने वाले पहले संक्रमित का अंतिम संस्कार पूरा हो सका. कुछ दिन पहले ही शिलॉन्ग के बीनेथी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ सायलो की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी, इसकी अगले ही रात उनकी कोरोना वायरस के चलते मौत हो गई. लेकिन जब उनका शव जलाने का समय आया, तो शमशान के आस पास रहने वाले इसका विरोध करने लगे. उनलोगों को इस बात का डर था की, अंतिम संस्कार से जो धुंआ निकलेगा, उससे आस पास रहने वाले लोगों को संक्रमण होने की आशंका है.

आपको बता दें की डब्ल्यूएचओ की गाईडलाइन्स के मुताबिक़, संक्रमित व्यक्ति के शव को जलाया ही जाना चाहिए . डॉ सायलो के मामले में भी स्थानीय प्रशासन यही करने वाला था, और उनका शव जलाने के बाद अस्थियां ताबूत में रख कर, उसे क्रिश्चियन परंपरा के मुताबिक़ डॉ सायलो के फार्म हाउस में ही दफनाना था. लेकिन लोगों के बवाल के कारण ऐसा हो नहीं सका. 

इसके बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन के मनाने के बाद डॉ सायलो के शव को दो दिन बाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों के द्वारा उन्हें ईसाइयों के कब्रिस्तान में दफनाया गया. सायलो 69 वर्ष के थे और उन्हें डायबिटीज और अस्थमा की बिमारी थी. सायलो के परिवार में 6 लोग और भी हैं, ये सभी भी पॉजिटिव आये हैं, जिनमे 2 बच्चे भी शामिल हैं. 


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