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Rath Yatra 2021 : भगवान जगन्नाथ से पहले देवी विमला ग्रहण करती है प्रसाद, जानिए क्यों

Rath Yatra 2021 : भगवान जगन्नाथ से पहले देवी विमला ग्रहण करती है प्रसाद, जानिए क्यों

जगन्नाथ पुरी में रथ यात्रा की तैयारियां जोरों शोरों से शुरू हो चुकी है. कल सोमवार को मंदिर परिसर से गुड़िचा मंदिर तक रथ यात्रा निकाली जायेगी. माना जाता है कि जगन्नाथ धाम में श्री विष्णु कृष्ण के रूप में साक्षात विराजमान है और इसे धरती का वैकुंठ भी कहा जाता है. इस दौरान देवी विमला के लिए 56 प्रकार के भोग तैयार किए जाते हैं और इस भोग को महाप्रसाद कहा जाता है.

जगन्नाथ से पहले देवी विमला को भोग 

खास बात यह है कि इस महाभोग को सबसे पहले देवी विमला ग्रहण करती है. इसके बाद ही भगवान जगन्नाथ को भोग लगाया जाता है. यानी देवी विमला को भोग लगने से पहले भगवान जगन्नाथ पहले ग्रहण नहीं कर सकते. क्योंकि कहा जाता है कि देवी विमला को भोग लगने के बाद भोग महाभोग बन जाता है. इसके बाद ही भगवान जगन्नाथ को प्रसाद अर्पित किया जाता है. फिर प्रसाद को भक्तों में बांटा जाता है.

जगन्नाथ मंदिर में विराजमान देवी विमला

जगन्नाथ धाम में विमला देवी का मंदिर दाई ओर पवित्र कुंड के पास बना हुआ है. मंदिर में देवी विमला की मूर्ति के चार हाथ है. ऊपरी दाहिने हाथ में देवी विमला माला धारण किए हुए हैं. उनके एक हाथ में एक कलश है. और एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में है. यह भव्य मंदिर बुलवा पत्थर और लेटराइट से बना हुआ है और इस मंदिर का मुख पूर्व दिशा की ओर है. इस मंदिर के शिखर को ’रेखा देउला’ कहा जाता है. 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि जगन्नाथपुरी देवी विमला का तीर्थ क्षेत्र है और वह जगन्नाथ पुरी की अधिष्ठात्री देवी हैं. देवी विमला को सती का स्वरूप भी माना जाता है. वही भगवान विष्णु उन्हें अपनी बहन मानते हैं. विमला देवी जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित है. माना जाता है कि इस जगह पर मां सती की नाभि गिरी थी और मां सती को ’विमला’ और भगवान शिव को ’जगत’ कहा जाता है.


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