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सिंधिया की बुआ वसुंधरा छोड़ेंगी बीजेपी?

सिंधिया की बुआ वसुंधरा छोड़ेंगी बीजेपी?

2022 में विधानसभा के चुनाव होने है. जिसकी तैयरियों में बीजेपी लगी हुई ही है. लेकिन बीजेपी को कहीं ना कहीं यह एहसास भी हो चुका है की अब उसकी पकड़ कमजोर होती जा रही है. इसलिए इन पांचों राज्यों के अलावा दूसरे राज्यों में भी बीजेपी ने अभी से अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश करना शुरू कर दिया है औीर पार्टी लगातार उसके अंदर चल रहे मतभेदों को शांत करने में लगी हुई है. खुद को मजबूत करने के लिए बीजेपी शासित चार राज्यों में सीएम बदलने के बाद अब बीजेपी का ध्यान उन राज्यों पर है जहां वो विपक्ष में है और उनके सबसे उपर है राजस्थान. 

राजस्थान में विधानसभा चुनावों में अभी दो साल से ज्यादा का समय है. लेकिन बीजेपी को अभी से राजस्थान विधानसभा की चिंता सताने लगी है. पार्टी राजस्थान की सत्ता में तो नहीं है, लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी जरूर है और अब सत्ता में वापसी चाहती है. इसीलिए उसने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. वही दूसरी तरह देखा जा रहा है कि भले ही पार्टी चिंतन शिविर करके खुद को मजबूत दिखा रही है, लेकिन असल में पार्टी के अंदर ही लड़ाई छीड गई है. बड़े नेताओं में आपसी खिंचतान अब खुलकर सामने आ रही है. इसे कम करने की हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है. 

चिंतन शिविर से बढ़ती गुटबाजी

कुंभलगढ़ में दो दिन तक बीजेपी का चिंतन शिविर का आयोजन हुआ. शिविर में सीएम चेहरे को लेकर साफ कर दिया गया की फिलहाल राजस्थान में पार्टी का चेहरा पीएम मोदी ही होंगे. पीएम के चेहरे पर सामुहिक नेतृत्व में भी राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा. वैसे चिंतन शिविर लगाया गया था की पार्टी में गुटबाजी पर लगाम लगाने के लिए. लेकिन चिंतन शिविर से संदेश बढ़ती गुटबाजी का ही निकला. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस चिंतन शिविर से दूरी बनाए रखी. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंन्दीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और भूपेन्द्र यादव इस चिंतन शिविर से गायब रहे. बीजेपी नेताओं के पास इस बात का कोई जबाव ही नहीं है कि राजस्थान बीजेपी के चेहरों में शुमार ये दिग्गज चिंतन शिविर में क्यों नहीं पहुंचे.

हो सकती है पार्टी में बगावत 

वसुंधरा राजे सिंधिया गुट की ओर से लगातार ये दावा किया जा रहा है यदि उन्हें सीएम प्रत्याशी नहीं बनाया गया तो पार्टी में बगावत हो सकती है. दरअसल, सतीश पुनिया को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद से राजस्थान में बीजेपी में गुटबाजी तेज हो गई है और बीजेपी के चिंतन शिविर में भी इसकी छाप दिखाई दी. यानी साफ है कि बीजेपी के अंदर ही कलह अब बढ़ चुकी है. कलह का कारण विधानसभा चुनावों में सीएम चेहरे को लेकर है. ऐसे में पार्टी ने अभी पीएम को ही आगे रखने का फैसला लिया है. बीजेपी की चिंता दर्शा रही है कि गुटबाजी ने पार्टी बुनयादी खोखली कर दी है. 


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