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महंत नरेंद्र गिरि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

महंत नरेंद्र गिरि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष मंहत नरेन्द्र गिरि की अंमित यात्रा शुरू हो चुकी है. मंहत नरेन्द्र गिरि की शव यात्रा को प्रयागराज के पानी की टंकी से लेटे हुए हनुमान मंदिर तक लाई जाएगी. पोस्टमार्टम के बाद नरेंद्र गिरी के पार्थिव शरीर को मठ ले जाया गया. जहां संगम घाट पर स्नान कराने के बाद लेटे हुए हनुमान जी के दर्शन कराए गए. वही मंहत नरेन्द्र गिरि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ चुकी है. रिपोर्ट में नरेंद्र गिरि की मौत की वजह फांसी लगना बताई गई है. वही विसरा सुरक्षित रख लिया गया है. नरेन्द्र गिरि का पोस्टमार्टम पांच डॉक्टरों की टीम ने किया था. इसके लिए बाकायदा पैनल गठित किया गया था. जिसमें दो विशेषज्ञ एमएलएन मेडिकल कॉलेज, दो डॉक्टर जिला अस्पताल और एक डॉक्टर शामिल था. हालांकि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का नाम गुप्त रखा गया है. 

आनंद गिरि से 12 घंटे पूछताछ

खबरों के अनुसार पुलिस ने महंत नरेन्द्र गिरि के शिष्य और आरोपी माने जा रहे आनंद गिरि से पुलिस ने करीब 12 घंटे की पूछताछ की है. पूछताछ के दौरान आनंद गिरि को महंत नरेन्द्र गिरि द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी बताया गया. लेकिन पूछताछ में आनंद गिरि एक ही बात बोलता रहा की महंत जी आत्महत्या नहीं कर सकते है, ये एक साजिश है. सूत्रों का कहना है कि यूपी पुलिस ने हरिद्वार आश्रम से आनंद गिरी का लैपटॉप, फ़ोन अपने कब्जे में ले लिया है, जिन्हे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा. नरेन्द्र गिरि को खुदकुशी के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को 12 बजे के बाद कोर्ट में पेश किया जाएगा.

बलवीर गिरि होंगे उत्तराधिकारी!

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. नरेन्द्र गिरि के कमरे से बरामद हुए सुसाइड नोट में उत्तराधिकारी का नाम लिखा मिला है नरेन्द्र गिरि ने नोट में उत्तराधिकारी के तौर पर बलवीर गिरि का नाम लिखा है. वही उन्होने उनकी मौत का जिम्मेदार सीधे तौर पर आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संतोष तिवारी को बताया है नरेन्द्र गिरि ने तीनों आरोपियों के नाम के साथ लिखा है कि मैं पुलिस व प्रशासनिक से प्रार्थना करता हूं कि इन तीनों के साथ कानूनी कार्रवाई की जाए जिससे मेरी आत्मा को शांती मिल सके.

पेट्रोल पंप से बढ़ी थी नरेन्द्र गिरि और आनंद गिरि के बीच तकरार

महंत नरेंद्र गिरी महाराज की मौत के मामले में गिरफ्तार किए गए आनंद गिरि महाराज महंत नरेंद्र गिरी के करीबी शिष्याें में से एक थे. आनंद गिरि को 14 मई 2021 में पंचायती अखाड़ा निरंजनी से निष्कासित कर दिया गया था. हालांकि आनंद गिरि को महंत नरेन्द्र गिरि का उत्तराधिकारी माना जाता था. बताया जा रहा है कि दोनों के बीच तकरार एक पेट्रोल पंप को लेकर उठी थी. दरअसल, बताया जा रहा है कि महंत नरेंद्र गिरी महाराज की शिक्षा कम थी और वह एक पेट्रोल पंप खोलना चाहते थे, शैक्षिक योग्यता कम होने के चलते महंत नरेंद्र गिरी महाराज ने अपने शिष्य आनंद गिरि के नाम से एक पेट्रोल पंप भी स्वीकृत करा लिया था और पेट्रोल पंप के उन्होंने उन्होंने मठ की जमीन आनंद गिरि के नाम कर दी थी. लेकिन बाद में महंत नरेंद्र गिरी महाराज को अपने शिष्य की गतिविधियां ठीक नहीं लगी तो, उन्होंने पेट्रोल पंप न लेने की बात कही. इसी बात को लेकर गुरू-शिष्य में तकरात बढ़ गई दोनों के बीच विवाद इतना हो गया की महंत नरेंद्र गिरी महाराज ने अपने शिष्य को मठ और मंदिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया. 

कैसे मिले नरेन्द्र गिरि को आनंद गिरि

आनंद गिरि जब 10 साल के थे महंत नरेंद्र गिरी महाराज को वह हरिद्वार में मिले थे. आनंद गिरि मूल रूप से राजस्थान के भीलवाड़ा के रहने वाले थे. वह बचपट में घर से भाग आए थे और एक चाय की दुकान पर काम करने लगे थे. नरेन्द्र गिरि ने आनंद गिरि को कुछ पैसे देकर अपने घर जाने को कहा था, तो आनंद गिरि ने घर जाने से मना कर दिया. इसके बाद नरेन्द्र गिरि उन्हें अपने साथ ले आए और संस्कृत की शिक्षा दी.


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