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मठ में दफन है मंहत नरेन्द्र गिरि की मौत का राज

मठ में दफन है मंहत नरेन्द्र गिरि की मौत का राज

नरेंद्र गिरी का अश्लील वीडियो से क्या है कनेक्शन!अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत कैसे हुई, उनकी किसने हत्या की या फिर किसी साजिश का शिकार हुए. इन सवालों के जबाव अभी आना बाकी है. लेकिन बाघंबरी मठ में उस दिन क्या हुआ, कौन आया कौन गया, सीसीटीवी फुटेजों में क्या मिला. इनके जबाव अभीतक सामने नहीं आ सके है. लेकिन महंत नरेन्द्र गिरि की मौत से जुड़े कई सवाल मठ की दीवारो में छिपे हुए है, जिन्हें बाहर आना जरूरी है.

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चौकाने वाली बात तो यह है कि महंत अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष थे. उन्हें सरकार द्वारा वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी. महंत की सुरक्षा में 11 जवान तैनात थे. लेकिन जिस दिन महंत का शव लटकता पाया गया उस दिन उनकी सुरक्षा में एक भी जवान तैनात नहीं था. महंत की सुरक्षा में हमेशा पीएसओ, कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल सहित कुल 11 जवान तैनात रहते थे. जवानों की आठ आठ घंटे की शिफ्ट लगाई जाती थी. लेकिन जिस दिन महंत की मौत हुई, उस दिन एक भी सुरक्षाकर्मी मैजूद नहीं था. घटना के पीछे सबसे बड़ा सवाल उनकी सुरक्षा को लेकर खड़ा हो गया है. इतना ही नहीं महंत की मौत से ऐसे जुड़े कई अनसुलझे सवाल है जो सीबीआई समय पर खुलासा कर पाती है की नहीं यह तो बाद में पता चलेगा. 

बताया जा रहा है कि महंत के आराम करने से लेकर उनके सोने के दौरान उनके कमरे के बाहर हमेशा एक सुरक्षा गार्ड तैनात रहता है. लेकिन जिस दिन उनकी मौत हुई उस दिन एक भी गार्ड मौजूद नहीं था. चर्चा है कि जब मठ के एक सेवादार चाय देने के लिए महंत के कमरे का दरवाजा खटखटाया तो दरवाजा नहीं खुला. इसके बाद फोन करने पर उनका मोबाइल नहीं उठा, तो मठ के सेवादारों ने दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे तो पूरी कहानी पता चली. लेकिन दरवाजा तोड़कर कमरे में जाना और मंहत की मौत का पता चलने में कितनी सच्चाई है, यह सीबीआई की जांच का हिस्सा हो सकती है. दरअसल, जिस कमरे में महंत का शव मिला उसके बाथरूम का दरवाजा अंदर से लिंक है और बाहर की ओर खुलता है. इतना ही नहीं, जब महंत को भू समाधी दी गई तो पहले ही शव के साथ नमक की बोरियां पहले ही पाटी गई, ताकी शव जल्द गलकर नष्ट हो जाए. ऐसे में अब सीबीआई अगर चाहे की महंत के शरीर पर चोट के निशान, फंदे के निशान की फिर से जांच करने के लिए समाधि से शव को बाहर निकाले तो कुछ भी हासिल नहीं होगा. 

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महंत के ड्राइवर का बड़ा खुलासा

महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर दुर्गेश ओझा ने भी बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि घटना वाले दिन महंत मठ से बाहर नहीं गए थे. क्योंकि घटना वाले दिन वो ड्यूटी पर नहीं था. महंत ने उसे सुबह 10 बजे बुलाया था और कहा की उनकी तबीयत ठीक नहीं है, तो घर जाओ और आराम करों. दुर्गेश ओझा ने दावा किया है कि महंत इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकते है. ड्राइवर ने बताया कि महंत जी अपनी कोई व्यक्तिगत बात किसी को नहीं बताते थे. 

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