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मुगल म्यूजियम को छत्रपति शिवाजी का नाम देकर योगी ने बड़ी जंग जीत ली है

नाम बदलने के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश सरकार अब एक नया काम करने जा रही है. सरकार आगरा के मुगल म्युजियम का नाम बदलने जा रही है. इस म्युजियम का नाम अब शिवाजी स्टेडियम किया जा रहा है. अब आप सोच रहे होगे कि स्टेशन शहर के नाम तक तो ठीक था, सरकार मु्यजियम का नाम क्यों बदल रही है. दरअसल, योगी सरकार इस म्युजियम का नाम बदलकर न केवल शिवाजी स्टेडियम रख रही है, बल्कि उसमें शिवाजी और उनके जीवन से जुडी चीजों को भी रखा जा रहा है नुमाइश के लिए. आगरा उत्तप्रदेश का वो शहर है जहां मुगलों की छाप है. मुगलों की इसी छाप पर योगी हिदुत्तव का कार्ड चलना चाहते है और आगरा ग्वालियर आसपास होने के चलते वहां तक मराठों और उनसे जुडे हिदुत्तव को जनता को दिखाना और बताना चाहते है.

योगी आदित्यनाथ ने एक बार लव जेहाद पर बोलते हुए कहा था कि अब कोई जोधा बाई अकबर के पास नहीं जाएगी. मतलब बड़ा साफ और क्लियर था बात धर्म की होगी जातपात की नही. अब सबसे बड़ा सवाल की योगी सरकार के इस फैसले का अभी क्या मतलब तो अगर ये कहे कि ऐसा करके योगी दो साल बाद आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी करना चाह रहे है तो गलत नहीं होगा. अगर हम उत्तरप्रदेश के पिछले दिनों की राजनीति पर गौर करे तो योगी को अपने वोटरों की बड़ी चिंता है, क्योंकि उत्तरप्रदेश में एक बड़ा वोट बैंक ब्राहम्णों का है. ब्राह्मणाें के इस वोट बैंक में दूसरे दल इन दिनों सेंध लगाने की कोशिश कर रहे है. खासकर कानपुर विकास दुबे एनकाउंटर और आगरा विधायक की गिरफ्तारी के बाद. बसपा सु्प्रीमो मायावती हो या फिर सपा के अखिलेश यादव जतिन प्रसाद ने तो ब्राह्मणाें की सहानभूति के लिए बकायदा एक संगठन तैयार कर लिया है. सभी विपक्षी दल मिलकर योगी की छवि को ब्राह्मण विरोधी बताने में जुटे है. 

पिछले दिनों के घटनाक्रम भी कुछ ऐसे थे, कि प्रदेश की जनता के बीच योगी की छवि लगातार ब्राह्मण विरोधी लगने लगी. जिस पर विरोधी दलों ने आग में घी डालने का काम शुरू कर दिया. यही वजह रही कि उत्तरप्रदेश सरकार के मुखिया योगी खुद को उस छवि से खुद को वोटों के नजरिए से गढ़ने की कोशिश कर रहे है. इसके लिए वो उत्तरप्रदेश की जनता के बीच जाति की नही बल्कि धर्म की बात करना चाहते है. योगी चाहते है कि जनता को हिदुत्तव की बात बताएं और कहें न की जातपात की.  

दरअसल, हिदुत्तव का राग छेड़ के योगी अपनी ब्राह्मण विरोधी छवि को खत्म करने की कोशिश कर रहे है. क्योंकि उत्तरप्रदेश में ब्राह्मणाें  का वोट बैंक 13 प्रतिशत है और वो 20 प्रतिशत वोट को प्रभावित करते है. ऐसे में योगी के लिए सबसे जरूरी है कि वो अपनी ब्राह्मण विरोधी छवि को खत्म करें. क्योंकि उत्तरप्रदेश में जो सरकार बनती है. उनको ब्राह्मणाें को एक तरफा साथ होता है. लेकिन 2014 ये वोट बैंक पूरी तरह से भाजपा के साथ है.


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