जन्माष्टमी पर यह चीजें दान करने से होते हैं कंगाल

वास्तु-शास्त्र : देश भर में कल यानी की 12 अगस्त को जन्माष्टमी का पावन त्यौहार मनाया जाएगा. बाज़ारों में इस त्यौहार को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी है. माना जाता है की यह पर्व भगवान विष्णु के धरती पर कृष्णा के अवतार में जन्म लेने की ख़ुशी में मनाया जाता है. जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु दिन भर का उपवास रखते हैं और रात में भगवान का जन्म हो जाने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं. 

वास्तु-शास्त्र के अनुसार तीज त्योहारों पर क्या चीज़ दान करनी चाहिए और क्या नहीं दान करनी चाहिए इसके बारे विस्तार से बताया गया है. हर त्यौहार की अपनी विशेषता होती है, इसलिए ऐसा कहा जाता है की त्योहारों पर कुछ चीज़ों का दान बिलकुल भी नहीं करनी चाहिए, नहीं तो आप कंगाल हो सकते हैं. कल जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा, तो आइये जानते हैं की इस पर्व पर कौन चीज़ों का दान करने से बचना चाहिए.

दही - जन्माष्टमी श्री कृष्ण के जन्म उत्सव के रूप में मनाई जाती है. श्री कृष्ण की प्रिय चीज़ों में से ही एक है दही. भगवान कृष्ण को दही काफी प्रिय है, इसलिए इस दिन दही का दान देना बहुत बड़ा पाप माना गया है. दही का दान यह दर्शाता है की आपको दही की ज़रुरत नहीं और आप उसे भगवान को नहीं चढ़ाना चाहते हैं.

बच्चों के कपड़े- जन्माष्टमी के पर्व पर श्री कृष्ण ने बालक के रूप में इस धरती पर जन्म लिया था. इसलिए इस दिन अपने घर के छोटे बच्चों के कपड़े किसी को भी दान में ना दें. बच्चों के कपड़े दान में देने का मतलब की श्री कृष्ण के कपड़ों को दान में देना. यह दान करने से बचें.

दूध- भगवान श्री कृष्ण को दही, माखन के अलावा दूध भी काफी ज़्यादा प्रिय होता है. इसलिए जन्माष्टमी के दिन आप इसका दान करने से भी बचें. जन्माष्टमी के दिन दूध का दान करना एक बहुत बड़ा पाप माना गया है.

पीला वस्त्र या मोर का पंख - जन्माष्टमी पर हम हमारे छोटे से कान्हाजी को सुन्दर पीले वस्त्रों में सजाते है. ऐसा कहा जाता है श्री कृष्ण का बदन नीले रंग का था, इसलिए उन पर पीले वस्त्र काफी जचते थे. इसलिए आप जन्माष्टमी के दिन कोई भी पीला कपड़ा और मोर पंख दान देने से बचें. इन चीज़ों का दान देना यह बताता है की आपको इनकी ज़रुरत नहीं है. 


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