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सबसे बडा हिंदू मंदिर जो हिदुस्तान में नहीं

भारत के कोर्ट ने राम मंदिर बनाने के लिए 500 एकड जमीन दी है, लेकिन हम आपको एक ऐसे मंदिर को दिखाते है जो 400 सौ से ज्यादा एकड में फैला है. वैसे तो भारत वर्ष में सबसे ज्यादा हिंदू धर्म को मानने वाले है. भारत में जितने देवी देवता और मंदिर है उतने विश्व में कही नही. वेद पुराण उपनिषद सभी के किस्से केवल भारतीय पौराणिक कथाओ में ही मिलते है लेकिन आपको जानकर आशर्चय होगा कि इसके बाद भी विश्व का सबसे बडा हिंदू मंदिर भारत में नहीं.

ये मंदिर ने भारत में नही ये बात अचरज है लेकिन उससे बडी बात ये है कि इस मंदिर में भगवान शिव नही बल्कि भगवान विष्णु विराजे है और ये मंदरि है यशोधरपुर में. जी हां यशोधरापुर पुराना नाम है आज लोग इस जगह को अंकोर के नाम से जानते है और मंदिर को अंकोरवॉट के नाम से जाना जाता है. ये मंदिर कबोडिया देश में है. आइए बताते है आपको कि कितना बडा और वैभवशाली मंदिर है ये और कौन कौन से देवी देवता विराजमान है इसमें...

मंदिर का बनावट और एरिया 

ये मंदिर 402 एकड में फैल हुआ है. इस मंदिर को 12 सदी में खामेर वंश के सम्राट राजा सूर्यवर्मन व्दितीय ने बनवाया था. कहते है राजा सूर्यवर्मन की चाहत अमर होने की थी. इसीलिए उन्होंने इतने बडे हिंदू देवी देवताओ के मंजिर को बनाया जिससे वो देवताओ के करी जा सके और किसी तरह अमरता का मंत्र पा सकें. हालाकि अक किवदंती ये भी कहती है कि इस मंदिर को खुद देवराज इंद्र ने अपने बेटे के महल के तौर पर बनवाया था. ये मंदिर बहुत ही खूबसूरत है ओंकरवॉट के इस मंदिर के गर्भगृह में विष्णु विराजमान है तो वहीं मंदिर की दीवारों और खंभो पर हिंदू देवी देवताओ के चित्र रामायण का वर्म और हिंदब धर्म से जुडे कई सारे चित्रो को खूबसूरती से उकेरा गया है. इसमें समुद्र मंथन से लेकर इंद्र लोक की अप्सराओ तक सभी का सुंदर चित्रण किया गया है. ज्यादातर हिंदू मंदिर और तीर्थ के दरवाजे पूर्व दिशा में होते है लेकिन इस मंदिर का दरवाजा पश्चिम दिशा में है. इस मंदिर में सुदरता के साथ साथ सबर्योदय और सूर्यास्त देखते बनता है. उगते सूर्य को मंदिर दंडवत करता दिखता है तो वही ढलते सूरज की रोशनी मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा देती है. मंदिर के अदभुद वास्तु और सौंदर्य और भव्यता के कारण यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया है. यहां विश्वभर से पर्यटको का जमावडा लगा रहता है.

मंदिर की आक्रमणकारियो से सुरक्षा के लिए चारो ओर से खाई बनाई गई है. 700 फीट गहरी खाई को झील का आकार दिया है और मंदिर के अंदर जाने के लिए एक लकडी का पुल बना है. इस मंदिर का दरवाजा 1000 फुट चाैडा है जिसपर पूरी रामाणय तस्वीरो में अंकित है. मंदिर में बौद्ध और हिंदू दोनो धर्मो से जुडा है यहां पहले हिंदू देवी देवताओ के साथ मंदिर है जिसे बाद में कंबोडिया में होने के चलते बौद्ध धर्म धामिक स्थल की तरह भी बना दिया, जिससे यहां दोनो ही धर्मो के लोगो का आना जाना है. इस मंदिर पर दोनो ही धर्म के लोग आस्था और विश्वास रखते हैं. 

राजा सूर्यवर्मन के पहले के शासको ने ज्यादातर शिव मंदिर बनवाए थे, लेकिन ये विष्णु मंदिर है. इस मंदिर को मेरूपर्वत का प्रतीक माना गया है हिंदू पौराणिक कथाओ के अनुसार मेरूपर्वत पर ब्रहामा सहित कई देवी देवताओ का वास है. कंवोडिया देश के प्रतीक तौर पर ये मंदिर है यही वजह है कि इस मंदिर की तस्वीर कंबोडिया देश के नेशनल फ्लेग में भी है.


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