liveindia.news

5 अगस्त : वो तारीख जिसने सैकड़ों साल पुराने संघर्ष पर फुल स्टॉप लगा दिया.

मंदिर वहीं बनाएंगे और तारीख भी बताएंगे.

सुन लीजिए. पूरा हिंदुस्तान चीख चीख कर कह रहा है 5 अगस्त 2020. तकरीबन तीन सौ साल पुराना संघर्ष. हजारों-लाखों कारसेवकों का बलिदान. सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुस्तानियों का सपना. इसी तारीख पर साकार होने जा रहा है. अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की पहली शिला रखी गई है. इसी पल के लिए तो न जाने  कितनी आंखें सदियों से इंतजार करती रहीं. ये भी क्या खूब है कि शिलान्यास ऐसे दौर में हुआ जब इस पल को दिलो दिमाग में कैद करने के लिए अयोध्या की पावन धरा पर मौजूद होना जरूरी नहीं. टेक्नॉलॉजी की बदौलत हर घर में अयोध्या लाइव हुई. हर नजर टीवी पर या मोबाइल पर टिकी. इस ऐतिहासिकि क्षण का लाइव प्रसारण हुआ. ये सीधा प्रसारण हिंदु एकता को रिलाइव करता रहा.

जो लोग सिर्फ एक तारीख सुनना चाहते थे उन्हें तो पांच अगस्त के रूप में एक जवाब मिल ही गया. जब कोरोना काल में भी भव्य समारोह के बीच राम लला के मंदिर की पहली ईंट रखी गई . महज 32 सेकंड का मुहुर्त है. इसके बावजूद शिलान्यास के लिए यही दिन चुना गया. ज्योतिषियों के अलग अलग मत है. किसी का दावा ये है कि इस मुहुर्त में किया गया काम तो सफल होगा ही नहीं. काम को अंजाम देने वाले पर भी विपत्तियों का पहाड़ टूट सकता है. कुछ पंडितों का दावा है कि इस दिन अभिजित मुहुर्त है. जो हर मुहुर्त में सर्वश्रेष्ठ है. इसलिए इस दिन का चयन किया गया है. अब पोथी, पत्र, अंक और ग्रहों की गणना के बारे में तो ये प्रकांड विद्वान ही बता सकते हैं. पर ये तय है कि ये तारीख बीजेपी के लिए बहुत शुभ है.

नहीं समझे तो दिमाग पर थोड़ा जोर डालिए और 5 अगस्त 2019 को याद कीजिए. ये वही दिन है जिस दिन बीजेपी ने कश्मीर को आर्टिकल 370 से मुक्ति दिलाई थी. फर्क केवल इतना है कि पिछले साल पांच अगस्त को लिए फैसले के बाद बवाल मचा था.  और इस बार पांच अगस्त पर होने जा रहे काम से पहले ही बवाल मचा है. तारीख और उससे जुड़े मुहुर्त के नाम पर शिलान्यस के काम को टालने का प्रयास पुरजोर तरीके से हुआ. पर जब तारीख नहीं टली तो सबके सुर ही बदले हुए नजर आए. अब सब तरफ से राम राम के स्वर सुनाई दे रहे हैं. 

पांच अगस्त देश के आध्यात्मिक इतिहास में ऐसी तारीख के रूप में दर्ज हो गई है. जिस दिन तीन सौ साल पुराना संघर्ष अपने अंजाम तक पहुंच रहा है. एक संघर्ष कश्मीर का था और एक संघर्ष राम मंदिर निर्माण का. दोनों को ही कामयाबी पांच अगस्त को ही मिली गई.

जूही वर्मा की कलम से


Leave Comments