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एक हत्या जिसमें कबूल करने वालो की लाइन लग गई

आमतौर पर हत्या के मामले में लोग अपने जुर्म नहीं कबूलते. लेकिन लॉस एंजिल्स का एक ऐसा भी मर्डर था जिसमें हत्या कि जिम्मेदारी एक दो नही बल्कि साठ लोगों ने ली थी. लेकिन पुलिस किसी एक को भी सजा नही दिला सकी. क्यों आइए बताते है आपको.

कड़ाके की सर्दी के दिन थे. 9 जनवरी 1947 का दिन था. ठंड से लोगों को जकड़ रखा था. लेकिन इस दौरान एक लाश मिलती है. लाश के कई सारे टुकडे किए गए थे. खास बात ये है कि लाश कमर के नीचे से कटी हुई थी. इसके कान, नाक और मुंह तक में इतने वार किए गए थे कि देखकर दिल दहल जाए. ये लाश थी एलिजाबेथ शार्ट की. 

एलिजाबेथ शार्ट अपने पति के साथ लॉस एंजिल्स में रहा करती थी. पांच दिन पहले वो गायब हुई. उसके बाद नहीं मिली. शहर के किसी दूसरे इलाके में उसकी लाश मिली. लेकिन उसका कातिल आजतक नही मिला. पुलिस ने बहुत तफ्तीश की लेकिन लाश के आसपास का कोई सुराग उसे हत्यारे तक नहीं ले जा सका. इस मर्डर को ब्लेक डाहलिया मर्डर केस के नाम से जाना जाता है. हैरत की बात तो ये है कि पुलिस की डायरी में सालाें बाद भी इसके आरोपी का ना नाम दर्ज हुआ न किसी को सजा. लेकिन बावजूद इसके उस समय तकरीबन पाचं दर्जन लोगों ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली. पुलिस हर कबूलने वाली की कहानी निकालती लेकिन हत्या की कडिया नही जोड पाती. लिहाजा मामला खत्म हो गया. पुलिसिया तफ्तीश में सभी के कबूलनामे साबित नहीं कर सके कि वो हत्यारे हैं. इसलिए सभी को छोड दिया गया. हालाकि मजेदार बात ये रही कि इस मर्डर के कबूलनामे उन लोगों ने भी किए जो उस समय पैदा तक नहीं हुए थे. इस मर्डर पर बाद में कई सारी किताबे भी लिखी गई. 

दुनिया में से बढकर एक हत्या और अपराध की कहानियां है, लेकिन अमेरिका की ऐसी मर्डर मिसट्री जिसमें एक साथ 60 लोगो ने मर्डर किया. लेकिन पुलिस आजतक उस गुनाहगार का पता नहीं लगा की. ब्लेक डाहलिया मर्डर केस साल 1947 में हुई हत्या ने देश भर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था. 

लॉस एंजिल्स के अनसुलझे मर्डर 

एलिजाबैथ शार्ट को बेल्न के नाम से 1947 में हई थी ये हत्या और आजतक अनसुलझा है. ये मामला वोस्टन की एलिजाबेथ शार्ट को 9 जनवरी को गायब लाश दूसरे इलाके में मिली. ये शरीर कमर से आधा कटा था. मंुह, कान चीर दिया था, लेकिन कटी हुई टुकडों में 60 लोगाें ने इसको कबूल किया. लेकिन पुलिस साबित नहीं कर सकी. उन लोगों में कुछ ऐसे भी थे जिनका जन्म हत्या के वक्त हुआ भी नहीं था. इस पर कई किताबे लिखी जा चुकी है. असल कालित अबतक पता नहीं लेकिन सकैडों लोग जुर्म कबूल कर रहे है. आज भी लोग इसकी चर्चा करते रहते है.


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