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अन्ना का फिर आंदोलन - क्या राजनीति क्या मायने

अन्ना हजारे ने एक बार फिर आंदोलन की धमकी दी है.अन्ना ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर आंदोलन की बात कही है. अन्ना ने सरकार से कहा है कि वो जनवरी में सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे और इस बीच अगर सरकार ने उनकी बात मान ली तो आंदोलन नहीं होगा. 

दरअसल अन्ना ने अपनी पुरानी मांगो को लेकर ही आंदोलन कर रहे हैं.पहली मांग लोकपाल का गठन और स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करना.  अन्ना ने आंदोलन के चार महीने पहले ही सरकार को चेता दिया है कि अगर सरकार ने लोकपाल का गठन नही किया तो फिर से धरने पर बैठूगा. अन्ना ने आंदोलन का तरीका अभी तक नही बताया कि क्या और कैसा होगा.

हांलाकि अन्ना की मांगो की बात करे तो शायद ये वही मांगे हैं या ये वही बातें है जिनका जिक्र नरेद्र मोदी भी करते रहे हैं.नरेद्र मोदी का दावा है कि तीन सालों में उनकी सरकार पर किसी तरीके का घपले घोटाले का आरोप नही लगा. सरकार की छवि बडी साफ सुथरी है.ऐसे में लोकपाल का गठन करना सरकार के लिए कठिन काम नही लगता.लेकिन बानजूद इसके सरकार बनने के तीन साल बाद तक लोकपाल का गठन नहीं हुआ.

अन्ना की दूसरी मांग स्वामीनाथन आयोग को लेकर थी कि एक न्यूनतम समर्थन मूल पर बात हो.अन्ना ने नई सरकार को पूरा मौका और समय दिया लोकपाल के गठन का लेकिन बात नहीं बनी. 

80साल की समाजसेवी अन्ना की चेतावनी के साथ ही पिछले आंदोलन की यादें ताजा कर दी.अन्ना का आंदोलन की देश का एकमात्र ऐसा आंदोलन था जिसने यूपीए सरकार की छवि पर सबसे ज्यादा नुकसान किया.यही एक आंदोलन था जिसने यूपीए सरकार की चूले हिला कर रख दी थी.अन्ना ने आंदोलन तो मांगे मानने पर वापस ले लिया था लेकिन उसके साइड इफेक्ट अभी तक देखने को मिल रहे हैं. 

सबसे बडे साइड इफेक्ट के तौर पर भ्रष्टाचार पर सरकार बार-बार घिर भ्रष्टाचार  सबसे बडा मुद्दा बना और 2014 मे यूपीए सरकार को कुर्सी छोडनी पडी. यूपीए सरकार ने तो कुर्सी छोडी लेकिन दूसरा बडा साइड इफेक्ट रहा सालों पुराने लोकतंत्र को रातोरात एक राजनैतिक दल मिल गया.केवल राजनैतिक दल मिला बल्कि उसने केंद्र सरकार की नाक के नीचे एक राज्य को फतह कर लिया और कई राज्यों में मौजूदा दलों का खेल बिगाडने का काम भी किया.

भ्रष्टाचार और कांग्रेस मुक्त भारती की बात करने वाली इस पार्टी में अब देखना होगा कि ये अन्ना को आंदोलन का मौका देगी या अन्ना की पाती पर बडी लोकपाल का गठन कर व्यवस्था में बडा बदलाव कर देगी.


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