डेरा सच्चा सौदा - मोक्ष का डेरा - या सियासत का सौदा

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम का मामला कोर्ट क्या पंहुचा डेरा समर्थकों ने बवाल मचा दिया. बाबा को सजा की कीमत छह राज्यों के पूरे के पूरे पंद्रह शहरों के लोगों को चुकानी पड रही है. पूरे 31 लोगों ने जान गंवाई और कई घायल हुए इसमें सरकारी संपत्ति के नुकसान का कोई आकलन नहीं किया गया है. 

ये बडी बात नहीं है कि मोक्ष का ज्ञान देने वाले एक बाबा की आध्यातमिक सत्ता राज्य औऱ केंद्र की सत्ता को चुनौती दे रही है. बाबा राम रहीम को अदालत ने दो साध्वियों के बलात्कार का दोषी करार दिया है और उनकी सजा का ऐलान 28 तारीख को होगा. लेकिन जिस तरह से बाबा के समर्थकों ने बवाल मचा रखा है ये तो साफ है बाबा को सजा होते ही किसी भी तंत्र को छोडेंगे नही बाबा के समर्थक क्योंकि उनके लिए बाबा सर्वोपरि है.
 
हालांकि बाबा राम रहीम खुद फैसले की घडी कोर्ट में खडे रहे लेकिन जिस तरह से अपने समर्थकों के जरिए उन्होंने जो शक्ति प्रर्दशन किया जो ताकत दिखाई वो राजनैतिक लोगों के लिए सरकारों के लिए चुनौती है. साथ ही इस बात का सबक की अगर इस तरह के बाबाओं को राजनैतिक सहारा मिलता है तो ये किस तरह कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं. 

बाबा राम रहीम डेरे के प्रमुख हैं डेरे की स्थापना लगभग आजादी के आस-पास की ही है. डेरे का काम वैश्विक भाईचारे को बढाने के साथ-साथ आध्यात्म के जरिए मोक्ष का रास्ता दिखाना. जिससे आदमी राग द्वेष भय औऱ मोह माया से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करे. लेकिन लोगों को मोह माया से मुक्ति का पाठ पढाने वाला बाबा खुद कितने मोह जालों में जकडे हैं ये उनके कारनामों से पता चलता है.
 
लेकिन अब सवाल ये है कि क्या वजह है मोक्ष का पाठ पढाने वाले ये सांसारिक बाबाओं के आसपास पूरी की पूरी सत्ता समाज क्यो मंडरा रहा है. दरअसल बाबा के देशभर में पचास से ज्यादा आश्रम हैं. लाखों की तादाद में अनुयायी हैं और बाबा हर चुनावों में वोटो का सौदा करते हैं. बाबा के पास देशभर में पचास से ज्यादा आश्रम हैं हजारों लाखों अनुयायी हैं.
 
अपने लाखों अनुयायियों के चलते बाबा हरियाणा और पंजाब के लगभग सौ सीटों पर असर डालते हैं. पिछले चुनावों में बाबा ने हरियाणा में बीजेपी का साथ दिया था और पंजाब में कांग्रेस का. लेकिन सियासी दलों की मजबूरियों का इस तरह के पाखंडी बाबा भरपूर फायदा उठा रहे हैं. धर्म के नाम पर लोगों को लूटने वाले इस तरह के बाबाओं की लिस्ट हिंदुस्तान में बहुत लंबी हैं लेकिन अब वक्त आ गया है कि सियासतदार इस बात को समझें और डेरो से आश्रमों से धर्म गुरूओं से और बाबा के अनुयायियों से वोटों का सौदा न करें. अगर सियासतदारों का साथ नहीं होगा तो बाबाओं की खैर नहीं जो धर्म का भरोसा दिलाकर मोक्ष का मार्ग दिखाकर खुद तो मोह माया कि रास लीला में डूबे होते हैं. साथ ही जनता को भी चाहिए कि भगवान की तलाश में धर्म के ठेकेदारों के पास न जाकर अपनी आत्मा की आवाज सुने न कि इस तरह के पाखंडी बाबाओं के जाल में फंसे.
 
तभी खात्मा संभव है इस देश से पाखंडी बाबाओं का डेरा और सियासतदारों से वोटों का सौदा.


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