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खेला होवे परिवर्तन होवे के बाद अब रैली का रोका होवे!

बंगाल चुनाव में क्या-क्या नहीं होगा. मैंने पहले भी कहा था शायद बंगाल ने इससे पहले ऐसे चुनाव नहीं देखे होंगे. पहले सभी दलों ने एक-एक कर ताल ठोकी. जीत के दावे किए और फिर रैली की रेलमपेल शुरू. मतदान के दिनो में तो आमने-सामने की कुश्ती ही बस छूट गई. बंगाल में चुनाव के चरण पूरे होते रहे और देश में महामारी की लहर जोर पकड़ने लगी. कुछ चरण बाकी थे कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता दीदी को जनता की याद आई और कोराना महामारी के चलते चुनाव आयोग से गुहार लगाई और बचे चुनाव एक चरण में करने को कहा, लेकिन आयोग ने बड़ी बैठक के बाद ऐसा करने से मना कर दिया और सभी राजनैतिक दलों को रैलियो में भी कोविड गाइडलाइन का पालन करने की नसीहत दे डाली. 

अभी बंगाल में तीन चरण का मतदान बाकी था, लेकिन राहुल गांधी ने ऐलान कर दिया कि वो अब बंगल में चुनावी रैलियां नहीं करेंगे. राहुल बाबा का ऐलान क्या हुआ ममता दीदी को भी लगा कि अब सही वक्त है वो भी रैलियां नहीं करने का ऐलान कर दें. ममता दीदी ने भी यही किया उन्होंने भी अब राजनैतकि रैलियों से तौबा कर ली. राहुल की रैलियों से तौबा करना तो कुछ जायज सा ही दिखाई देता है, क्योंकि बंगाल के चुनाव में सीधा-सीधा मुकाबला टीएमसी और बीजेपी का ही है. कांग्रेस केवल और केवल 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. ऐसे में रैली नहीं करने का राहुल का ऐलान कांग्रेस को कितना फायदा दिलाएगा पता नहीं, लेकिन बीजेपी को सीधे तौर पर नुकसान दे सकता है. क्योंकि सोशल मीडिया के साथ-साथ रैलियों में राहुल बाबा की इमेज को बीजेपी बहुत कैश कराती है.

तो कहीं न कहीं बीजेपी की सोशल मीडिया को राहुल की गैर मौजूदगी खल सकती है, लेकिन अब बात है ममता दीदी की. वापस सत्ता हासिल करने का दम भरने वाली दीदी ने आखिर ऐसा क्यों किया. दरअसल दीदी चाहती हैं कि किसी तरह बीजेपी पर दबाव बने. बीजेपी पर नैतिक दबाव बनाने के लिए दीदी ने बिना किसी देरी राहुल के साथ रैलियां नहीं करने का ऐलान कर दिया. 

राहुल की तरह दीदी का ऐलान बीजेपी की सेहत पर कोई असर नहीं डालने वाला, क्योंकि बीजेपी का पार फोकस इस समय गैर हिंदी भाषी राज्यों में सत्ता पर काबिज होना है. बहरहाल चुनावी नतीजे बताऐंगे कि रैली को रोका TMC का वोट दिलाएगा या बीजेपी की मौजूदगी पर ठप्पा लगाएगा.

दीप्ति चौरसिया

डिप्टी एडिटर, न्यूज नेशन

 


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