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Movie Review - नोक-झोंक से भरी है फिल्म गुलाबो-सीताबो

कोरोना वायरस महामारी के चलते लॉकडाउन के कारण रिलीज़ के लिए अटकी फिल्म गुलाबो सीताबो आज अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हो चुकी है. लंबे समय से अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना के फेन्स को फिल्म गुलाबो-सीताबो का इंतज़ार था. आज यह फिल्म अमेज़न प्राइम वीडियो इंडिया पर रिलीज़ हो गई है. आइये जानते है इस फिल्म की कहानी के बारे में .

फिल्म की कहानी लखनऊ के नवाबी ठाठ बाठ वाले हिस्से की है, जहां अब बस खंडर ही बचे हैं. ऐसे ही एक खंडर फातिमा महल है, जिसकी मालकिन बेगम हैं, जो अपने से 17 साल छोटे शोहर मिर्जा (अमिताभ बच्चन) के साथ वहां रहती हैं. उनका एक किरायदार भी है बांके(आयुष्मान खुराना) जो अपनी मां और बहन के साथ वहां रहता है. बाकें और मिर्ज़ा की बिलकुल नहीं बनती. बांके को 30 रूपए महीने का किराया भी ज़्यादा लगता है. वहीं मिर्ज़ा अपनी बेगम की मौत का इंतज़ार करता है, ताकि महल उसके नाम हो जाए. 

इसी बीच पुरातत्व विभाग का एक अफसर महल पर कब्ज़ा करने के लिए आ जाता है. मिर्जा अपने वकील के साथ मिलकर महल को अपने नाम करने की कोशिश करता है. वहीं बांके भी बीच में कूद जाता है और प्रॉपर्टी डीलर की मदद से महल अपने नाम कराने की साज़िश रचने लग जाता है. सारे किरदार महल अपने नाम कराने की कोशिश में लगे रहते हैं. लेकिनब अंत में महल किसके नाम होता है यह देखने के लिए आपको ज़रूर देखनी होगी गुलाबो सीताबो. 


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