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तांडव रिव्यू : सैफ के दम पर टिका है राजनीती का तांडव

मूवी रिव्यू :सैफ अली खान की मच अवेटेड वेब सीरीज तांडव रिलीज़ हो चुकी है. जैसा की इस सीरीज का नाम ठीक उसी तरह सीरीज में राजनीती के तांडव को दिखाया गया है. इस वेब सीरीज में भारतीय राजनीती के पहलुओं को काफी गहराई के साथ दिखाया गया है. अगर आप भी राजनीती से रिलेटेड मूवीज देखने के शौक़ीन हैं तो आपके लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है वेब सीरीज तांडव. आइये जानते हैं इसकी कहानी के बारे में. 

कहानी : देश में दक्षिणपंथी पार्टी जन लोक दल (जेएलडी)का राज दिखाया जाता है. जन लोक दल तीसरी बार आम चुनाव जीतने वाली है और इस बार भी ये लगभग  देवकी नंदन (तिग्मांशु धूलिया) प्रधानमंत्री बनने वाले थे , लेकिन चुनाव के नतीजे आने से ठीक पहले देवकी नंदन की मौत की खबर आती है. ऐसे में अब प्रधानमंत्री पद का दावेदार देवकी नंदन का बेटा समर प्रताप सिंह (सैफ अली खान) है. लेकिन  कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब समर प्रताप की जगह देवकी नंदन की ख़ास रही अनुराधा ( डिंपल कपाड़िया ) को पीएम बना दिया जाता है. 

कहानी शुरू होती है तो लगता है की सैफ फिल्म के हीरो साबित होंगे, लेकिन जब कहानी आगे बढ़ती है तब पता चलता है कि, फिल्म में असली हीरो डिंपल कपाड़िया हैं. डिम्पल कपाड़िया कैसे सत्ता को अपने नाम करती हैं यह देखने के लिए आपको ज़रूर देखनी होगी तांडव.. इस वेब सीरीज के ज़रिये देश के कई मुद्दों को दिखाने कि कोशिश की गयी है. स्लो कहानी के बावजूद इस वेब सीरीज के किरदार आपको कहानी से जुड़े रहने पर मजबूर करते है. ओवरआल देखा जाए तो बड़ी स्टार कास्ट के साथ तांडव वन टाइम वाच ज़रूर है. 

 


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