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अपने ही गढ़ में शिवराज से हारे सिंधिया

मध्यप्रदेश डेस्क : मध्यप्रदेश में चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी. राज्य की दोनों ही सक्रीय पार्टियां अपने-अपने अंदाज़ से जनता को लुभाने की कोशिशें कर रही है. लेकिन मध्यप्रदेश का यह उपचुनाव शुर हुआ तो ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के बीच के तनाव के साथ था, लेकिन अब इस उपचुनाव का माहौल पूरी तरह से बदल गया है. क्यूंकि अब इस उपचुनाव में सभी का फोकस सिंधिया और कमलनाथ से हटकर, शिवराज और कमलनाथ पर शिफ्ट हो गया है. 

आपको बता दें कि, मध्यप्रदेश में उपचुनाव 28 सीटों पर होना है, ऐसे में मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार यह उपचुनाव सिंधिया के चेहरे पर ही लड़ रही है. क्यूंकि 28 में से 20 विधानसभा सीटों पर तो सिंधिया के ही समर्थक हैं. इतना ही नहीं इन 20 सीटों में से भी 16 सीटें सिंधिया के घराने यानी की ग्वालियर चंबल में आती हैं. इन सीटों पर सिंधिया जमकर प्रचार कर रहे हैं ताकि, उनके समर्थकों को वहां से जीत हासिल हो. लेकिन बीजेपी द्वारा कराया गया स्टारप्रचारक का सर्वे तो कुछ और ही बयां का रहा है.

सूत्रों से मिली जानकारी की मानें, तो बीजेपी ने हाल ही में अपने प्रत्याशियों के बीच एक सर्वे कराया था. जिससे यह पता चल सके कि, प्रत्याशी अपने क्षेत्र में कस स्टार प्रचारक को ज़्यादा देखना चाहते है. इस सर्वे का नतीजा यह हुआ की सिंधीअ को अपने ही गढ़ में शिवराज से हार का सामना करना पड़ा. क्योंकि अधिकतर प्रत्याशी चाहते हैं कि, सिंधिया के बजाए खुद सीएम शिवराज प्रचार करें. 

दरअसल, प्रत्याशियों का मानना है कि, अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके क्षेत्र में प्रचार करने आते हैं तो इसका खामयाजा प्रत्याशी को भुगता पड़ सकता है. क्यूंकि कांग्रेस के एक कम्पैन के कारण सिंधिया की छवि दलबदलू और गद्दार वाली बन गई है. इसलिए प्रत्याशी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं. 
 


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