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राजस्थान में बंद हो सकते है सरकारी स्कूल

लाइव इंडिया न्यूज- वसुंधरा राजे सरकार ने राजकीय स्कूलों को निजी क्षेत्र में देने का फैसला कर लिया है. इसके लिए बाकायदा "स्कूली शिक्षा में PPP नीति-2017" का मसौदा तैयार किया गया है. कैबिनेट ने इसकी मंजूरी भी दे दी है. पहले चरण में राज्य की 300 स्कूलों को निजी भागीदारों को सौंपा जाएगा. निजी भागीदार सरकारी स्कूलों की जमीन, इमारत और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करेगा लेकिन उसे स्टाफ की व्यवस्था खुद करनी होगी. इन स्कूलों में लगे शिक्षकों को दूसरी सरकारी स्कूलों में समायोजित कर दिया जाएगा. आपको बता दें कि इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक याचिका पर फैसला दिया था कि नेताओं, नौकरशाहों और जजों के बच्चे राजकीय यानी सरकारी स्कूलों में पढ़ें. इसके बाद सरकारी शिक्षा व्यवस्था की दशा और दिशा पर काफी बहस हुई थी.
आमतौर पर सरकारी/राजकीय स्कूल के नाम से जेहन में ऐसी तस्वीर उभरती है जिसमें खराब इंफ्रास्ट्रक्चर यानी खस्ताहाल इमारत या इमारत विहीन जगह; टूटा फर्नीचर या नीचे टाट पट्टी पर बैठे बच्चे; ऊंघते से न पढ़ाने की इच्छा वाले या हाजिरी लगा कर गायब हो जाने वाले टीचर और बेहद खराब परिणामों वाले स्कूल होते हैं.
आजादी के बाद शिक्षा और चिकित्सा को विशेष तौर पर सार्वजनिक क्षेत्र में रखे जाने पर जोर दिया गया था. इसका उद्देश्य था कि गरीब जनता को कम से कम खर्च में उचित सुविधाएं मिल सकें. लेकिन बाद के दौर में लालफीताशाही और लापरवाही ने दोनों ही क्षेत्रों की हालत बदतर कर दी. ASER रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे सरकारी स्कूल में पांचवीं का बच्चा दूसरी कक्षा की किताब भी नहीं पढ़ पाता.
यहीं कारण है कि समय-समय पर सरकारी स्कूलों की दशा सुधारे जाने की आवाज उठती रही है. विभिन्न राज्यों ने कदम भी उठाए हैं जैसे शिक्षकों की वेतनवृद्धि को छात्रों के परिणामों से जोड़ना या बायोमैट्रिक हाजिरी की व्यवस्था. लेकिन राजस्थान सरकार ने दूसरा ही तरीका ढूंढ़ा है.


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