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फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह का कोरोना से निधन

भारत के महान एथलीट और फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह का निधन हो गया है. मिल्खा सिंह बीते एक महीने से कोरोना के खिलाफ लड़ रहे थे. हालांकि उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी. लेकिन इसके बाद भी उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. मिल्खा सिंह ने शुक्रवार की देर रात चंडीगढ़ के PGIMER अस्पताल में दम तोड़ दिया. 

मिल्खा सिंह का जन्म पाकिस्तान के गोविंदपुरा में हुआ था. लेकिन बटवारे के दौरान हुई त्रासदी के शिकार होने के बाद वह भारत आ गए थे. बंटवारे के दौरान हुए दंगों में उनके माता पिता और एक भाई और दो बहनों की हत्या कर दी गई थी. भारत आने के बाद मिल्खा सिंह कुछ दिनों तक अपनी बहन के घर में रहे, एक बार ट्रेन में बगैर टिकट यात्रा के जुर्म में उनको जेल भी हुई. मिल्खा सिंह कुछ दिनों तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी रहे, इसके बाद उनकी बहन ने अपने गहने बेंचकर उन्हें जेल से छुड़ाया. जेल से निकलने के बाद मिल्खा सिंह रेफ्यूजी कैंप में रहने लगे.

मिल्खा सिंह का जीवन संघर्ष में गुजरा है. वह इतने हताश हो गए थे की वह चोरी डकैती करने लगे. लेकिन अपने भाई मलखान के कहने पर सेना में भर्ती होने का प्रयास शुरू किया और उनका सेना में चयन हो गया. इसके बाद से मिल्खा सिंह का जीवन बदल गया. इसके बाद मिल्खा सिंह ने एथलेटिक्स में कदम रखा. एथलेटिक्स में आने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1956 में उन्होंने मेलबर्न ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन वह हीट रेस से आगे नहीं बढ़ पाए. भारत आने के बाद उन्होंने 1958 में कटक में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में 200 और 400 मीटर स्पर्धा में रिकाॅर्ड बनाया. इसके साथ ही उन्होंने एशियाई खेलों में भी भारत का नाम रोशन किया. काॅमनवेक्थ खेलों में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था. मिल्खा आजाद भारत के ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्होंने भारत को स्पर्ण पदक दिलाकर एथलीट बने थे. 

मिल्खा सिंह कई दशको से देश के युवा एथलीट्स को प्रेरित करते रहे, लेकिन बीते शुक्रवार को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन मिल्खा सिंह कई दशको तक एथलीट्स खिलाड़ियों के दिलों में बसे रहेंगे.


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