इस बार की छुट्टी मनाईए उदयपुर की जयसमंद झील की हसीं वादियों में

लाइव इंडिया न्यूज- एशिया की दूसरी बडी कृत्रिम मीठे पानी की झील जयसमंद झील पिछले 27 वर्षो में पांचवी बार छलकने को आतुर हैं. जल संसाधन विभाग के सूत्रों के अनुसार 27 फीट भराव क्षमता वाली यह झील वर्ष 1973, 1990,1994, 2016 में छलकी थी तथा इस वर्ष लबालब हो चुकी हैं. वर्ष 2006 में मुसलाधार बारिश से जयसमंद का गेज 27 फीट से ऊपर चला गया था. मेवल और छप्पन की लाइफ लाइन कही जाने वाली जयसमंद झील के भरने की उम्मीद लगाए रहते हैं.

उदयपुर शहर की जलापूर्ति का सबसे बडा केन्द्र भी यही झील हैं. यहां से पाईपलाइन से रोजाना हजारों लीटर पानी उदयपुर में आता हैं. कहा जाता है कि इस झील को भरने के लिए नौ नदी और 99 नालें मदद करते हैं. इसमें मुख्यतः गोमती नदी जिसको खरका नदी कहते हैं, झाझरी नदी, सिरोली नदी, मकरेडि नदी, बम्बोरा, खेराटी नदी, रुपारेल नदी, कुराबड, बुंढेल और गींगला नदी समेत 99 नालों का संगम होता हैं.

गौरतलब है कि मेवाड के महाराजा जयसिंह ने गोमती नदी पर वर्ष 1685 में इसका शिलान्यास किया और वर्ष 1730 में इसकी पाल बनकर तैयार हो चुकी थी. महाराज जयसिंह के नाम से इसका नाम जयसमंद झील रखा गया था. यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक इसकी खासियत से खींचे चले आते हैं. पाल की लंबाई 335 मीटर हैं तो ऊंचाई 35 मीटर हैं इसका कुल भंडारण क्षमता 414.6 मिलियन एकड़ फीट है, 37 हजार हेक्टेयर से भी ज्यादा कमांड एरिया हैं.


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