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West Bengal के चुनाव को भुला नहीं पाएंगी पीढ़ियां, ऐसा क्या है खास?

चुनावी बिसात क्या बिछी एक-एक नेताओं की दलों की चालों ने चुनाव को बवाल बना दिया. बंगाल ने कभी ऐसे चुनाव नहीं देखे. पहले बिसात पर देर तक नेताओं का आना-जाना ज्यादातर बीजेपी के कारपेट पर चले जाना. उसके बाद बयानों को बाण और फिर ममता का मास्टर स्ट्रोक पैर टूट जाना.

बंगाल में क्रिया की प्रतिक्रिया 

सब कुछ क्रिया की प्रतिक्रिया के तौर पर इतनी तेजी से हो रहा था कि लग रहा था, डाल डाल और पात पात का झगडा हो, नहले पर दहला लगातार हो और तैयार हो. दीदी को पैर में चोट आना बीजेपी नेता का बरमुड़ा पहनने का सुझाव देना. ये सब पहले चरण की वोटिंग तक बीत चुका था.

नंदीग्राम का एपिसोड 

दूसरे चरण की वोटिंग में नंदीग्राम का एपिसोड बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के आमने-सामने आना और फिर बीजेपी का दीदी को लेकर शोर मचाना कि वो किसी और सीट से भी चुनाव लडेंगी. बदले में टीएमसी को मोदी को ललकारना और वाराणसी में ताल ठोकने की चुनौती देना. ये सब बिल्कुल स्क्रिप्टेट अंदाज में चल रहा है. कारण भी बड़ा ही साफ है कि टीएमसी के चुनावी चालें चलने वाले भी वहीं हैं जो कभी बीजेपी की चानवी बिसात बिछाया करते थे. प्रशांत किशोर जो कभी बीजेपी के खेवन हार थे, तो 2014 के बाद से बीजेपी के बंटाधार की कसम खाकर बैठे हैं. शायद यही वजह है कि बीजेपी की हर चाल का अंदाजा उनको पहले से होता है और वो जबाव की तैयारी में भी होते हैं.

BJP का गैर हिंदी भाषी राज्यों में दखल

आमतौर पर हिदुस्तान के गैर हिंदी भाषी राज्यों में दोनों मुख्य दलों खासकर बीजेपी का दखल बहुत कम हुआ करता था. बीजेपी ने 2014 के बाद से लगातार गैर हिंदी भाषी राज्यों में दखल देना शुरू किया. वहां के चुनावों में ताल ठोकना शुरू किया. 

कैलाश विजयवर्गीय का डेरा

यही वजह रही कि बंगाल में कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले सात सालों से डेरा डाल रखा था. जिसके नतीजे अब देखने को मिल रहे हैं. ममता दीदी ने लेफ्ट की 24 साल की सरकार उखाड़ फेकी थी और बंगाल में दमखम से टीएमसी ने ना केवल सरकार बनाई बल्कि राज कर रही है. वहीं कांग्रेस का कोई अस्तित्व ही नहीं है तो बीजेपी ने टीएमसी में घुसपैठ करके वहां पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं. 

बहरहाल कौन किसको हरायगा, कौन जीतकर सरकार बनाएगा ये सबके सामने होगा. लेकिन, दिमाग का दही बनाने वाले इस चुनावों के किस्से बंगाल की राजनीति में निर्णायक होंगे. लेकिन, वहां की जनता इसके किस्से आने वाली पीढ़ियों को सुनाएगी.

 


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