बंगाल में भागवत के बाद अमित शाह को भी रोका

भारत की राजनीति में एक चलन इन दिनों आम होता जा रहा है. ये है सरकार में बैठे नेता और राजनीतिक पार्टी द्वारा अपनी सत्ता की सरहद में विरोधियों की एंट्री बैन कर देने का चलन. इस तरह के रवैए को विपक्ष तानाशाही बताता है, तो सत्ता पक्ष कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए अपने कदम को जायज ठहराता है.

सूत्रों के अनुसार तीन अक्टूबर को कोलकाता के प्रसिद्ध सरकारी स्वामित्व वाले सभागार महाजति सदन में एक कार्यक्रम होना था. इसमें मोहन भागवत भाषण देने वाले थे, लेकिन अधिकारियों ने इस हॉल की बुकिंग रद्द कर दी. भागवत के भाषण का विषय था 'भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन में सिस्टर निवेदिता की भूमिका.'

माना जा रहा है कि ममता बनर्जी मोहन भागवत के कार्यक्रम को रोक कर सिर्फ अपने वोटरों को ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी संदेश देना चाहती हैं कि हिंदुत्व के एजेंडे को केवल वही रोक सकती हैं. दूसरी ओर बीजेपी भी मोहन भागवत के कार्यक्रम के रद्द होने को भुनाने में लगी है और ममता पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है.

भागवत के बाद अब शाह पर भी रोक

सूत्रों की माने तो ममता बनर्जी के इस सियासी तेवर का शिकार केवल मोहन भागवत ही नहीं बल्कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी हुए हैं. अमित शाह 11 से 13 सितंबर के बीच पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान 12 सितंबर को उनके कार्यक्रम के लिए नेताजी इनडोर स्टेडियम बुक किया गया था, लेकिन वहां पर कुछ काम चलने का तर्क देकर प्रशासन ने इसकी परमिशन नहीं दी. इसे लेकर बीजेपी के तेवर और गर्म हो गए हैं.


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